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परिसीमन के बाद भी नहीं टूटा सहसवान में सपा का तिलिस्म

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बदायूं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को सहसवान में होंगे। जिले में सहसवान ही एक ऐसी इकलौती विधानसभा सीट है जहां परिसीमन के बाद भूगोल और जातीय समीकरण तो बदल गए, लेकिन भाजपा यहां सपा का तिलिस्म तोड़ने में कामयाब नहीं हो सकी। 2017 में मोदी लहर के बावजूद यहां भाजपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहा था। जिले की बाकी पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया था।
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1991 के विधानसभा सामान्य निर्वाचन में ओमकार सिंह यादव यहां जनता दल से पहली बार विधायक चुने गए थे। 1996 में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने सहसवान सीट से चुनाव जीता। मुलायम के इस्तीफे के बाद 1997 में हुए उप चुनाव में ओमकार सिंह ने फिर से सहसवान सीट पर कब्जा कर लिया। विधानसभा चुनाव 2002 में भी यह सीट सपा की झोली में चली गई। ओमकार सिंह फिर बड़े अंतर से विधानसभा पहुंचे। 2007 के विधानसभा चुनाव में डीपी यादव ने ओमकार सिंह को मामूली अंतर से हराया, इसके बाद 2012 में नए परिसीमन पर पहले और 2017 में दूसरे चुनाव में भी ओमकार सिंह ने यहां जीत दर्ज की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का सहसवान विधानसभा सीट पर खास फोकस है।
दरअसल, 2012 के परिसीमन में सहसवान विधानसभा में नगर पंचायत इस्लामनगर, रुदायन के साथ ही बिसौली विधानसभा क्षेत्र की दो, बिल्सी के ब्लॉक अंबियापुर की छह, इस्लामनगर ब्लॉक की चार न्याय पंचायतें भी सहसवान में शामिल हो गईं। छह न्याय पंचायतें गुन्नौर विधानसभा में चली गईं। जो नई न्याय पंचायतें सहसवान विधानसभा में शामिल हुईं उसके बाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का वोट बैंक बढ़ा, लेकिन इसके बाद भी सहसवान में भाजपा को कामयाबी नहीं मिल सकी। ऐसे में इस बार भाजपा का सहसवान पर ज्यादा फोकस है।
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योगी आदित्यनाथ के सहसवान में कार्यक्रम को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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जातीय और भौगोलिक समीकरण भाजपा के पक्ष में
परिसीमन के बाद सहसवान में भाजपा का वोट बैंक बढ़ा है। कुल 4.12 मतदाताओं में एक लाख वोट भाजपा का ही है। भाजपा के लिए जिताऊ उम्मीदवार चाहिए। पिछले चुनाव की बात करें तो ऐन मौके पर पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था। कुछ वजह रहीं जो भाजपा के मतदाता प्रत्याशी से खुश नहीं थे और इसका खामियाजा हार के रूप में मिला। पुरानी बातों को भूलकर पार्टी नए जोश में है। जातीय और भौगोलिक समीकरण पूरी तरह भाजपा के पक्ष में हैं। हम दावे से कह सकते हैं कि इस बार सहसवान सीट पर भाजपा का कब्जा होगा।
-अवढर शर्मा, निवर्तमान विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष भाजपा, सहसवान
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परिसीमन के अलावा काम से भी मजबूत हुई सपा
परिसीमन से सपा का किला और मजबूत हुआ है। सहसवान क्षेत्र की ही बात करें तो यहां सपा सरकार में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं। सपा के शासन में मंजूर बदायूं-मेरठ हाईवे का काम भाजपा सरकार अब तक पूरा नहीं करा सकी है। जिले से दो मंत्री भी केंद्र व राज्य सरकार में हैं पर हमारे नेता धर्मेंद्र यादव ने सांसद रहते ही सपा सरकार में जो काम कराए, वह आज भी मिसाल हैं। सरसोता धर्मस्थल तो सभी की आस्था का केंद्र है, इसका सौंदर्यीकरण भी सपा सरकार ने ही कराया। यहां भाजपा कितना भी जोर लगा ले पर सपा का प्रत्याशी ही जीतेगा।
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- नवाब सिंह यादव, सपा विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष, सहसवान
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