बदायूं। विधानसभा चुनाव अभी भले ही छह महीने दूर हैं, लेकिन राजनैतिक दलों ने चुनावों के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है। इन दिनों जिले की राजनीति जातिवाद के इर्द-गिर्द घूम रही है। राजनीतिक धुरी में सवर्ण और पिछड़े हैं। एक ओर भाजपा से ब्राह्मणों की नाराजगी को सपा अपने हित में मानते हुए पिछड़ों को जोड़ने में लगी थी, वहीं भाजपा ने जिले में अचानक से नेतृत्व परिवर्तन कर राकेश मिश्रा को जिला प्रभारी और राजीव गुप्ता को जिलाध्यक्ष बनाकर बिगड़ रहे समीकरण संभालने की कोशिश की है। दूसरी ओर कांग्रेस और बसपा इन दिनों खामोशी से संगठन की मजबूती पर जोर दे रही हैं।
तीन सितंबर को परशुराम चौक के लोकार्पण के बाद से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आयोजन में मंच पर सिर्फ भाजपाई नजर आए। इसके जवाब में कुछ ब्राह्मण संगठनों ने पांच सितंबर को ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया और संयुक्त ब्राह्मण मोर्चा के गठन का ऐलान कर दिया। शहर में ब्राह्मण संकल्प यात्रा भी निकाली गई। ब्राह्मण सम्मेलन में लगभग सभी राजनीतिक दलों से जुड़े लोग पहुंचे। हालांकि, लोकार्पण कार्यक्रम में मंच साझा करने वाले ब्राह्मण इस सम्मेलन से दूरी बनाए रहे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में भाजपा से ब्राह्मणों की नाराजगी एक बार फिर चर्चाओं में आ गई।
इस बीच अचानक भाजपा ने अशोक भारती को जिलाध्यक्ष पद से हटाकर राजीव गुप्ता को जिले की कमान दे दी और शाहजहांपुर के पुवायां तहसील के गांव अनावा निवासी राकेश मिश्रा को जिला प्रभारी बना दिया। राकेश मिश्रा शाहजहांपुर के भाजपा जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। इसके जरिए भाजपा ने अगड़ों को साधने की कोशिश की है। पिछड़ा वर्ग खासकर लोध वोट बैंक को अपने पक्ष में रखने के लिए भाजपा बीएल वर्मा को केंद्रीय राज्यमंत्री बनाकर पहले ही मैदान में उतार चुकी है।
विधानसभा चुनाव के से पहले जमीन तैयार कर रहीं भाजपा और सपा के बीच वोट बैंक को लेकर पंचायत चुनाव से ही टक्कर चल रही है। सपा का इन दिनों ज्यादा ध्यान मौर्य-शाक्य-कुशवाह बिरादरी पर है। यादव-मुस्लिम को सपा का आधार वोट माना जाता है। पिछले दिनों महान दल राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य मौर्य-शाक्य-कुशवाह बिरादरी को सपा के पक्ष में करने को यात्रा लेकर बदायूं आ चुके हैं। परशुराम चौक के लोकापर्ण कार्यक्रम में लगभग पूरी भाजपा जुटी थी, लेकिन पार्टी के मौर्य-शाक्य बिरादरी के नेता आयोजन से दूरी बनाए रहे थे। इसको लेकर भी कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं।
जिलाध्यक्ष बनने के बाद कमजोर हुई राजीव की दावेदारी
बदायूं। वो मुझे जहर देता तो सबकी नजर में आ जाता, उसने ये किया कि मुझे दवा न दी...किसी शायर की ये पंक्तियां लोग इस समय राजीव गुप्ता को जिलाध्यक्ष बनाने पर मौजू मान रहे हैं। राजीव दातागंज नगर पंचायत के लगातार दो बार चेयरमैन रह रहे हैं। चेयरमैन का पद पिछड़े वर्ग में आ गया था, वर्ना उनका निर्वाचन फिर तय माना जा रहा था। प्रदेश स्तर पर दातागंज नगर पंचायत के कूड़ा निस्तारण के उनके मॉडल को सराहा गया था। अब वह शहर विधानसभा से टिकट के दावेदार थे। लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। संघ और भाजपा के बड़े नेताओं से नजदीकी और मिलनसार स्वभाव से उनका लक्ष्य सफल होता दिख रहा था। ऐसे में मौजूदा विधायक और नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता की दावेदारी को लेकर भी चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन भाजपा ने ऐन मौके पर जिले की कमान राजीव गुप्ता को सौंप दी है। ऐसे में माना यह भी जा रहा है कि उन्हें अचानक जिलाध्यक्ष बनाने के पीछे भी कोई राजनैतिक मंतव्य छुपा है और इससे राजीव गुप्ता की विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी कमजोर हो सकती है।
दातागंज बना जिले की राजनीतिक धुरी
बदायूं। सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता दोनों दातागंज के निवासी हैं। राजीव गुप्ता लगातार दस साल तक दातागंज नगर पालिका के चेयरमैन रहे हैं और प्रेमपाल सिंह पूर्व विधायक हैं। विधानसभा दातागंज क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी रहे डॉ. शैलेश पाठक फिलहाल किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं, लेकिन वह जिले भर में ब्राह्मणों को चुनावों से पहले एकजुट करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। पंचायत चुनाव के दौरान सपा में शामिल होकर सुनीता शाक्य को जिपं अध्यक्ष चुनाव लड़ाने वाले पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य भी दातागंज के हैं। ऐसे में मौजूदा हाल में जिले की राजनीतिक धुरी दातागंज बनता दिख रहा है।
भाजपा सभी छह सीट जीतेगी: राजीव
भाजपा जातिवाद या धर्म की राजनीति नहीं करती। प्रधानमंत्री मोदी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बातें करते हैं। दूसरी पार्टियां इस समय मुद्दा विहीन हैं और हताशा में भाजपा पर आरोप जड़ रही हैं। पार्टी ने मुझ जैसे आम कार्यकर्ता को जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे निभाऊंगा। पार्टी सभी छह विधानसभा सीटें जीतेगी। रही बात मेरी टिकट की दावेदारी की तो ऐसे सभी मामलों में भाजपा हाईकमान ही फैसला करता है। व्यक्ति की महत्वाकांक्षा अपनी जगह है पर भाजपा जैसी पार्टी में संगठन का निर्देश सर्वोपरि है। - राजीव गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष
घबराई है भाजपा, इसलिए हो रहे परिवर्तन: प्रेमपाल
भाजपा घबराई हुई है। जिले में अचानक नेतृत्व परिवर्तन इसी का नतीजा है। सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं हर वर्ग भाजपा शासन में त्रस्त है। सपा की जमीन तैयार है भाजपा विधानसभा चुनाव में सपा के सामने नहीं टिक सकेगी। सपा के सभी प्रकोष्ट, मोर्चा और युवा टीमें बूथ से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक जमीनी काम कर रही हैं। चुनाव में भाजपा की हार निश्चित है।-प्रेमपाल सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष