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दातागंज के हर्रामपुर मतदान केंद्र पर घुंघट की ओट में वोट डालने पहुंचीं महिलाएं। संवाद - फोटो : BADAUN
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रिंकू पांडेय
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बदायूं। जिले के पिछड़े, खासकर गंगा और रामगंगा की कटरी के गांवों में 21 वीं सदी में भी आधी आबादी को अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि चुनने की आजादी नहीं है। पति या फिर घर के बड़ों के कहने पर ही वे वोट देती हैं। घूंघट की ओट में रहने वाली इन महिलाओं को न तो मुद्दों की जानकारी है और न प्रत्याशियों की, घर के बड़े ईवीएम में जो निशान बता देते हैं वह वही बटन दबा देती हैं। ऐसी ही हाल रामगंगा की कटरी में बसे बेहद पिछड़े दातागंज विधानसभा क्षेत्र के गांव हर्रामपुर का है। इतना ही नहीं मतदान केंद्र के बाहर घूंघट में ही महिलाओं ने सैनिटाइजेशन कराया।
दातागंज विधानसभा क्षेत्र के गांव हर्रामपुर की आबादी करीब 1300 है। यहां नौ सौ से अधिक मतदाता हैं। इनमें महिलाओं की संख्या चार सौ से ज्यादा है। कटरी में हर्रामपुर के आस-पास बसे शेरपुर, गढ़िया, पैगंबरपुर, मौजमपुर में भी आबादी और मतदाताओं का लगभग यही अनुपात है। रामगंगा के उस पार शाहजहांपुर सीमा पर स्थित हर्रामपुर यादव बाहुल्य गांव है। यहां मतदान केंद्र पर लाइन में लगी महिलाओं से घूंघट हटाने को कहा तो वे तैयार नहीं हुई। मतदान करके वापस आईं तब बात करने पर उन्होंने बताया कि पति और परिवार के बड़ों ने मशीन पर जिस निशान का बटन दबाने को बताया वह उन्होंने दबा दिया।
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लक्ष्मी से पूछा कौन सा बटन दबाया तो उन्होंने बताने से इनकार कर दिया। कृष्णा देवी, राजकली ने भी कुछ नहीं बताया।
शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव भुंडी नगला, जटा, प्रेमी नगला, कदम नगला, दल नगला, रहपुरा, कमलैयापुर, जसवंत नगला, ठकुरी नगला आदि में भी महिलाओं की यही स्थिति है। यह गांव भी जिले में काफी पिछड़े हुए हैं। यहां महिलाएं पति या फिर परिवार में किसी बड़े के बताए प्रत्याशी को ही वोट देती हैं। प्रेमी नगला की कमला देवी की उम्र करीब 57 साल है। अब भी वह पूरा घूंघट डालती हैं। शादी के करीब 38 साल बाद भी वह अपनी मर्जी से वोट नहीं दे सकी हैं। सहसवान में गंगा के तटवर्ती आसेनगला, कोतल नगला, तेलिया नगला, तोफी नगला, परशुराम नगला, खागी नगला में भी महिलाओं को अपनी मर्जी से मतदान करने की ज्यादा आजादी नहीं है।
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कटरी के 180 तटवर्ती गांवों में भी जमकर बरसे वोट
जिले में गंगा सहसवान विधानसभा क्षेत्र से प्रवेश करते हुए शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र और इसके बाद दातागंज विधानसभा क्षेत्र से होते हुए फर्रुखाबाद जिले में प्रवेश करती हैं। गंगा की जिले में लंबाई करीब 135 किमी है और तटवर्ती गांवों की संख्या 180 से ज्यादा। इन तटवर्ती गांवों में 90 फीसदी गांव बेहद पिछड़े हुए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सुरक्षा समेत मूलभूत सुविधाओं का अब भी इन गांवों में अभाव है। महिला शिक्षा का स्तर पर बेहद खराब है। हालांकि दुश्वारियों के बावजूद 180 तटवर्ती कटरी के गांवों में भी खूब वोटिंग हुई।
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घूंघट की ओट में वोट का खेल खत्म पर घूंघट से पीछा नहीं छूटा
बदायूं। तटवर्ती गांव कभी चुनाव का रुख बदलने का काम करते थे। कई तटवर्ती गांव तो घूंघट की ओट में वोट के खेल के लिए भी जाने जाते थे। महिलाओं के जरिये यहां चुनावों में फर्जी वोटिंग को लेकर विवाद भी होते थे। कई बार नौबत बूथ कैप्चरिंग और फायरिंग तक आ जाती थी, लेकिन मतपत्र का जमाना गुजरने और ईवीएम के साथ फोटो युक्त मतदाता सूची आने के बाद यह खेल तो खत्म हो गया, लेकिन महिलाएं आज तक इस घूंघट से पीछा नहीं छुटा सकीं। रामगंगा के उस ओर बसे गांव हर्रामपुर के रामपाल, छबिनाथ और कृष्णपाल का कहना है कि महिलाओं का घूंघट हमारे गांव की परंपरा है।
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शहरी महिलाओं ने प्रत्याशी को बनाया आधार
बदायूं। शहर व अन्य कस्बों में महिलाओं ने खुलकर वोट डाले। यहां महिलाओं से बात की तो उन्होंने प्रत्याशी व पार्टी के आधार पर वोट देने की बात कही। अधिकतर महिलाओं का कहना था कि उनके लिए प्रत्याशी की छवि व विकासशील सोच मायने रखती है। राजकीय इंटर कॉलेज बूथ पर मिली सुरभि का कहना था कि वोट किसी और की नहीं अपनी मर्जी से डाला है। संवाद
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अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं ने खामोशी से की जोरदार वोटिंग
बदायूं। जिले भर में अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं ने जोरदार तरीके से मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। उन्होंने शहर से लेकर देहात के इलाकों तक वोट डाले।
सहसवान के प्रमोद इंटर कॉलेज में बुर्कानशीं महिलाएं सुबह से कतार में लगी थीं। मतदान प्रक्रिया धीमी होने के बाद भी वे घर नहीं गईं और वोट डालकर ही निकलीं। वोट किसे दिया? इस सवाल को उन्होंने टालने की कोशिश की। हालांकि कुछ ने कुछ पार्टियों के नाम हिचक के साथ लिए। अधिकतर ने कहा कि वोट डालना उनका हक था, उन्होंने हक निभाया। अब चाहे जो विधायक और सरकार बने। हमारे परिवारों को तो अपनी मेहनत की कमाई से गुजारा करना है। संवाद
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शिक्षित महिलाएं बोलीं-मुद्दे पर वोट करने की महिलाओं को भी आजादी
बदायूं। गांव-देहात और जिले के पिछड़े इलाकों में महिलाओं के पति और परिवार में बड़ों के कहने पर वोट देने के मसले पर शिक्षित महिलाओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी अपनी मर्जी से मुद्दों और अच्छे प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने की आजादी है। इन महिलाओं ने कहा कि वे तो अच्छे प्रत्याशी को वोट देती हैं। मुद्दों पर और अच्छा काम करने वाले को चुनने को मताधिकार का इस्तेमाल करती हैं।
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यह बोलीं महिलाएं
महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं तो मताधिकार का प्रयोग करने में पीछे क्यों रहें, आखिर क्यों वह दूसरे लोगों की पसंद के प्रत्याशी को मुद्दों से हटकर वोट दें।
- आरती सिंह
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यह बात सही है कि पिछड़े हुए गांवों में महिलाएं अब भी चूल्हा-बर्तन से बाहर नहीं आ सकी हैं। उनको अब भी घूंघट का सहारा लेना होता है। महिलाओं को भी पूरे अधिकार हैं।
-मंजू तोमर
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पिछड़ापन है कि महिलाएं मतदान भी दूसरों के कहने पर करती हैं। ठीक है कि परिवार के लोग उनको किसी प्रत्याशी विशेष के बारे में बताते हैं, लेकिन उनकी भी राय लेना जरूरी है।
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-मेनका पाठक
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महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। मतदान में भी उनको अपने अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए। पति और बड़ों की बात मानना अच्छी बात है, लेकिन चुनाव में अंतर्रात्मा की आवाज अरूरी है।
- नीरज सिंह
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