वजीरगंज। कस्बे में संचालित हो रहे अवैध अस्पतालों पर शिकंजा कसने के बजाए जिम्मेदार नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ले रहे हैं। इस वजह से अवैध अस्पतालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। कस्बे में 36 अस्पताल संचालित हो रहे हैं जबकि सीएमओ कार्यालय के रिकार्ड के मुताबिक सिर्फ चार का ही पंजीकरण है।
नगर के मुख्य चौराहे से लेकर कोई मोहल्ला ऐसा नहीं है जहां अवैध अस्पताल संचालित नहीं हो रहा है। गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा चुकी है। हर बार पुलिस कार्रवाई का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। मामला अगर तूल पकड़ता है तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार नोटिस भेजकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं।
समझौता होने के बाद नहीं हुई कार्रवाई
पिछले साल चार अक्तूबर को वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव पुन्नापुर निवासी अजय पाल ने पत्नी नन्ही देवी (23) को प्रसव पीड़ होने पर सीएचसी में भर्ती कराया था। एक आशा ने उनको निजी नर्सिंग होम जाने की सलाह दी। वहां जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। दोनों पक्षों में समझौते के बाद यह मामला रफा-दफा हो गया। वहीं, इसी साल सात मई को जाहरपुर निवासी सुल्तान सिंह की 32 वर्षीय पत्नी रीना उर्फ गुड्डो की प्रसव के दौरान मौत हो गई। बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया मगर झोलाछाप ने परिवार वालों से समझौता कर लिया।
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टीम के पहुंचने से पहले ही लीक हो जाती है सूचना
अवैध अस्पतालों और पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच के लिए डॉ. मोहन झा को नोडल बनाया गया है। टीम क्षेत्र में तो जाती है लेकिन, कार्रवाई नहीं हो पाती। सूत्रों की मानें तो टीम के पहुंचने से पूर्व ही सूचना लीक हो जाती है।
वर्जन:
शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। अवैध मिलने पर अस्पताल को सील भी किया जाता है। सभी सीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके क्षेत्र में कोई भी अवैध अस्पताल संचालित न हों। अगर होते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वजीरगंज में इतने अवैध अस्पताल हैं इसकी जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी। - डॉ. अब्दुल सलाम, एसीएमओ