उसकी नाक से दूधनुमा झाग आ रहा था। परिजन की बात से पता चला कि सम्भवत: बच्चे को लिटाकर दूध पिलाया गया होगा, इससे उसकी सांस नली बंद हो गई और उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इतने छोटे बच्चों को लिटाकर दूध पिलाना घातक हो जाता है।
जब भी बच्चे को दूध पिलाएं दूध और कंधा ऊंचा रखें: डॉ. शरद
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता भी छोटे बच्चों को दूध पिलाने के संबंध में विशेष एहतियात बरतने की सलाह देते हैं। वह कहते हैं कि दूध या कोई भी तरल पेय पिलाते वक्त छोटे बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए, खासकर डेढ़ साल तक के बच्चे का विशेष ध्यान रखें।
जब भी दूध पिलाएं बच्चे का कंधा और सिर ऊंचा रखें। बोतल से तो बिल्कुल दूध न पिलाएं। इससे दूध सांस नली में जाने का खतरा रहता है। दूध पिलाने के बाद कम से कम पंद्रह मिनटकर बच्चे को कंधा पर लिटाकर सहलाएं। रोते हुए बच्चे को कभी दूध न पिलाएं। पहले उसे चुप कराएं फिर दूध पिलाएं। रोते समय भी सांस नली में दूध जाने का डर है।
इन बातों का हमेशा रखें ख्याल
- दूध पिलाते समय बच्चे के सिर के नीचे एक पतला तकिया रख दें।
- बोतल से दूध पिलाने से बचें। चम्मच-कटोरी से दूध पिलाएं।
- दूध पिलाने के बाद कंधे पर लिटाकर सहलाएं ताकि उसे डकार आ जाए।
- बच्चे को सुलाने के दौरान भी कंधा और सिर ऊंचा रखें
- मुंह और नाक का ध्यान रखें, सोते समय इन्हें खुला रखें
- सांस नली में दूध जाने का एहसास हो तो करवट से लिटाकर पीठ थपथपाएं।
- सबसे खास बात ये है कि छोटे बच्चे को माता पिता अपनी मौजूदगी में ही दूध
या पानी पिलाएं। छोटे बच्चों पर यह काम नहीं छोड़ें।
एक महीने पहले अस्पताल में सांस रुकने से हो गई थी बच्चे की मौत
भगवतीपुर का मजरा मढ़ैया वैसे तो शहर के नजदीक है लेकिन आज के माहौल को देखते हुए यहां शिक्षा का काफी अभाव है। इस हादसे के बाद यह भी माना जा रहा है कि इस प्रकार की घटनाओं की जिम्मेदार अशिक्षा और जागरूकता का अभाव है। गांव में बच्चों के लालन पालन संबंधी जागरूकता ग्रामीणों में ज्यादा नहीं होती और अक्सर ऐसे हादसे हो जाते हैं। एक माह पहले भी ऐसी ही एक घटना अस्पताल में हो चुकी है।
करीब एक माह पहले महिला अस्पताल में मां का दूध पीने के दौरान नवजात की मौत हो गई थी। महिला उसहैत की रहने वाली थी। परिवार वालों ने उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहीं उसकी डिलीवरी हुई। इसके उपरांत उसे कंगारू मदर केयर यूनिट में भर्ती कर दिया गया। महिला वहीं बच्चे को अपना दूध पिला रही थी। काफी देर बाद उसने ध्यान दिया तब तक बच्चे की सांस नली बंद हो चुकी थी।
इस पर परिवार वालों ने हंगामा भी किया लेकिन बाद में वह अपने घर चले गए। इसके अलावा सितंबर 2020 में कुंवरगांव कस्बे में एक दर्दनाक घटना हुई थी। कस्बे के वार्ड नंबर दो निवासी रमेश ने अपने ट्रैक्टर की टंकी का कचरा साफ करने के लिए सारा डीजल निकाला था। उसे एक बाल्टी में भरकर रख दिया था।
परिवार वाले अपने काम में व्यस्त थे। उनका डेढ़ साल का रमन घर में खेल रहा था। खेल खेल में वह बाल्टी में औंधे मुंह गिर गया। परिवार वाले उसे निजी अस्पताल ले गए जहां उसकी मौत हो गई। उस वक्त लॉकडाउन चल रहा था।
पिता बोला- बच्चों को पढ़ाउंगा
गांव निवासी धर्मेंद्र इस बात को मानता है कि पढ़ाई जरूरी है। धर्मेंद्र के मुताबिक उसके पांच बेटे थे, जिनमें कमल सबसे छोटा था। उसका सबसे बड़ा 15 वर्षीय बेटा पप्पू गांव के प्राथमिक स्कूल में कक्षा पांच का छात्र है। अन्य बच्चे अभी छोटे हैं। वह अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है। दो-चार साल पहले ही गांव में स्कूल बना था। इससे पहले बच्चे पड़ोसी गांव में जाया करते थे। इतनी सुविधाएं नहीं थीं, जिससे गांव के बच्चे पढ़ पाते। उसका परिवार मजदूरी पर निर्भर है। हादसे के बाद उसे इस बात का अहसास और ज्यादा है कि पढ़ाई और बाहर का ज्ञान कितना जरूरी है।