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Budaun News: अब जांच टीम पर उठ रहे सवाल शासन से टीम आने की सुगबुगाहट

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बदायूं। इलाज के अभाव में बच्ची की मौत का मामला शासन तक पहुंचने पर वहां खलबली मची हुई है। मेडिकल कॉलेज की टीम ने आनन-फानन में टीम गठित कर जांच कर संविदा पर तैनात दो डॉक्टरों की सेवाएं तो अवश्य समाप्त कर दीं, लेकिन अब खुद प्राचार्य व जांच पर सवाल उठ रहे हैं। मां-बाप सबसे पहले बच्ची को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले गए थे, हालत गंभीर होने के बाद भी यहां बच्ची को भर्ती नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर की कोई कमी नहीं बताई गई है। इन सबके बीच सुगबुगाहट है कि शासन स्तर से इस मामले के लिए जांच टीम आ सकती है।
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मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव थलिया नगला निवासी नाजिम की दस वर्षीय बेटी सूफिया के गले में इंफेक्शन था। इस कारण वह सांस नहीं ले पा रही थी। हालत ज्यादा खराब होने पर परिजन प्राइवेट अस्पताल से उसे बुधवार को मेडिकल कॉलेज ले गए। नाजिम ने बताया कि सुबह नौ बजे बच्ची को लेकर वह मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे, जहां मौजूद डॉक्टर व कर्मचारियों ने उसको भर्ती नहीं किया। इधर-उधर डॉक्टर के कक्ष में भेजते रहे।
तीन घंटे बाद 12 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस मामले में प्राचार्य ने पहले तो घटना से ही इनकार कर दिया था। जब मामला हाईकमान तक पहुंचा तो आनन-फानन में कागजी जांच कराके दो डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दीं और दो को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई खुद मेडिकल कॉलेज में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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कहा जा रहा है कि असली जिम्मेदार तो इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर थे, जबकि जांच में इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर का कहीं कोई जिक्र ही नहीं किया गया है। अगर बच्ची को इमरजेंसी में भर्ती कर लिया गया होता तो संभव था कि उसकी जान बच जाती। खुद मौत के बाद बच्ची का पिता वीडियो में यह बात कहता नजर आ रहा है।
बावजूद इसके जांच टीम ने असल जिम्मेदारों को बचा लिया। बताया यह भी जा रहा है कि संविदा के डॉक्टरों को तो बर्खास्त कर दिया गया, लेकिन शासन से तैनात जिन दो डॉक्टरों का निलंबन किया गया है, वह सिर्फ एक-एक माह के लिए है। ऐसे में सबसे कमजोर कड़ी पर कार्रवाई करके मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपनी गर्दन भी बचा ली व असल जिम्मेदारों को भी। मामला कुछ लोगों ने शासन तक पहुंचा दिया है। इसके बाद शासन स्तर से जांच करने टीम आने की बात कही जा रही है।



पति की इमरजेंसी में ड्यूटी, पत्नी जांच टीम में शामिल
जिस डॉक्टर की इमरजेंसी में ड्यूटी थी, उसकी जांच प्राचार्य ने मेडिकल कॉलेज में ही उच्चपद पर तैनात उस डॉक्टर की पत्नी को सौंप दी। इससे साफ जाहिर है कि इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर को बचाने का प्रयास किया गया है। वो भी तब जब खुद बच्ची के पिता ने कहा है कि वह बच्ची को सबसे पहले इमरजेंसी कक्ष में लेकर गया था।




मेडिकल कॉलेज में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन शुरू
बदायूं। इलाज के अभाव में बच्ची की मौत के मामले में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार 12 बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज में शुरू कर दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह ने कहा कि परिसर में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रहीं हैं।
आरएलडी और आरएनएल जैसी डिप में लगने वाली बोतलें मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रहीं हैं। उन्होंने कहा जब तक अव्यवस्थाएं सही नहीं हो जातीं, धरना जारी रहेगा। धरनास्थल पर निर्दोष माथुर, धर्मेंद्र प्रजापति, सोमवीर नेताजी, धर्मेंद्र कुमार, बंटी भारती, छत्रपाल सिंह, फरमान आदि कांग्रेसी मौजूद रहे। संवाद




जांच कमेटी ने जो जांच आख्या दी है उसके अनुसार कार्रवाई की गई है। इसमें पाया गया है कि परिजन बच्ची को इमरजेंसी न ले जाकर सीधे ओपीडी में ले गए थे। जहां डाक्टर नहीं मिले। लापरवाही के चलते चार डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है।-
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डा. अरूण कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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