सिरासौल का मां खेड़े वाली देवी का मंदिर। संवाद
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बिल्सी। गांव सिरासौल जसा पट्टी में स्थित खेड़े वाली देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से हर मनोकामना पूर्ण होने के साथ ही उन्हें कष्टों से मुक्ति भी मिल जाती है। उझानी रोड पर स्थित मंदिर में चैत्र नवरात्र में माता रानी के पांच दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ब्रजमोहन सिंह चौहान ने बताया कि 1990 में घास छीलने वाले एक व्यक्ति को खेड़े के निकट मूर्ति मिली। वह उसे अपने घर ले गया, जिसके बाद उस व्यक्ति पर कष्ट आने शुरू हो गए। बताते हैं कि उसी दौरान देवी ने उसे स्वप्न दिया कि जहां से मुझे लाया था, वहीं स्थापित कर दे। अगले दिन उसने गांव के लोगों की मदद से देवी प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया और खेड़े पर मां का विशाल मंदिर बनाने कराने का निर्णय लिया। बाद में चंदा करके मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर बने 32 वर्ष हो चुके है। वर्तमान में यहां श्री शिव-पार्वती, गणेश जी, बजरंगबली, दुर्गा देवी, शनिदेव एवं राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी प्राण प्रतिष्ठित हैं। पिछले कई वर्षों से यहां मुनेंद्र दास महंत हैं। संवाद