निरीक्षण में आधी-अधूरी फैकल्टी, नोडल विभाग को नोटिस
एमसीआई ने दिसंबर में किया था मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण
राजकीय मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से फिलहाल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने इंकार कर दिया है। एमसीआई की टीम अब फिर से मेडिकल कॉलेज का दौरा कर यहां फैकल्टी की जांच करेगी। इससे पहले मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना होगा। इससे पहले भी एक बार एमसीआई मेडिकल कॉलेज को फेल कर चुकी है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने 20 दिसंबर 2014 को बदायूं में इस राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। करीब 543 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक शासन 300 करोड़ रुपये जारी कर चुका है। काम भी करीब 80 फीसदी पूरा हो चुका है। पिछले साल अक्तूबर में ओपीडी भी चालू कर दी गई। हालांकि, अभी इमरजेंसी सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। प्रदेश सरकार की मंशा थी कि यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज को एमसीआई से मान्यता मिल जाए ताकि 2017 से यहां मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो सके। मेडिकल कॉलेज के निर्माण से लेकर मान्यता तक के लिए कार्रवाई की जिम्मेदारी आगरा मेडिकल कॉलेज को दी गई है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की आठ सदस्यों की टीम ने दिसंबर 2017 के दूसरे सप्ताह में मेडिकल कॉलेज के साथ जिला अस्पताल का भी निरीक्षण किया था। सरकार को उम्मीद थी कि एमसीआई से मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिल जाएगी, लेकिन इस पर पानी फिर गया है। फैकल्टी आधी-अधूरी होने की वजह से एमसीआई ने फिलहाल मान्यता देने से इंकार कर दिया है। मान्यता में सबसे बड़ा रोड़ा मेडिकल कॉलेज का भवन बना है। एमसीआई ने मान्यता से इंकार करते हुए मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी को नोटिस भेजा। नोडल अधिकारी डॉ. नीरज यादव ने नोटिस का जवाब भी दे दिया। इसके बाद भी एमसीआई ने रुख स्पष्ट नहीं किया है।
---------
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मेडिकल कॉलेज में भवन पर आपत्ति लगाई है। एमसीआई ने भवन निर्माण का काम पूरा होने से पहले मान्यता से इंकार किया है। एमसीआई ने इसको लेकर जो नोटिस दिया था उसका जवाब दे दिया गया है।
-डॉ. नीरज यादव, नोडल अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज-बदायूं