बदायूं। जिले की राजनीति में मुलायम सिंह यादव व मायावती जैसे बड़े नेता किस्मत आजमा चुके हैं। 1996 के चुनाव में मायावती बिल्सी और मुलायम सिंह यादव सहसवान सीट से चुनाव मैदान में थे। मुलायम सिंह यादव को 54 हजार से ज्यादा वोट से जीत मिली। मायावती को कम अंतर से जीत मिली तो उन्होनें इस्तीफा दे दिया।
बसपा सुप्रीमो मायावती 1996 में बिल्सी सीट से चुनाव मैदान में उतरी थीं। उनके मुकाबले भाजपा के योगेंद्र सागर भाजपा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। मायावती को 47473 और योगेंद्र सागर को 44958 वोट मिले। मायावती यह चुनाव 2515 वोट से जीतीं थीं। उन्होने बाद में इस्तीफा दे दिया और हरौड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनी रहीं। सहसवान सीट पर मुलायम सिंह यादव को 81370 और भाजपा के महेश गुप्ता को 27211 वोट मिले। मुलायम सिंह यादव ने यह चुनाव 54159 वोट के अंतर से चुनाव जीता। राष्ट्रीय परिवर्तन दल के मुखिया डीपी यादव ने 2007 में सहसवान विधानसभा सीट से सबसे कम अंतर से जीत दर्ज की। डीपी यादव को इस चुनाव में 33882 और सपा के ओमकार सिंह यादव को 33774 वोट मिले। डीपी यादव इस चुनाव में 108 वोट के अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे।
लोकसभा चुनाव में भी बदायूं से शरद यादव, स्वामी चिन्मयानंद जैसे लोग मैदान में उतर कर लोकसभा पहुंचने के साथ सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव बदायूं से दो बार सांसद रह चुके हैं। राजीव गांधी के करीबी रहे सलीम शेरवानी बदायूं से पांच बार लोकसभा पहुंच कर मंत्री बन चुके हैं। विधान सभा से लेकर लोकसभा तक बदायूं का दबदबा रहा है।
1977 में बिल्सी सीट पर मैदान में थे सिर्फ दो प्रत्याशी
बदायूं। बिल्सी, सहसवान और गुन्नौर विधानसभा सीट हमेशा चर्चा में रहीं। यहां से बड़ी राजनैतिक शख्सियत मैदान में उतरीं। 1977 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो बिल्सी सीट पर सिर्फ दो प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जनता पार्टी के सोनपाल पिप्पल इस बात यहां सें विधायक चुने गए। उनको 28635 वोट मिले। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के केशवराम रहे। केशवराम को 26364 वोट मिले थे।