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किसान बोले- डीजल दस रुपये सस्ता करने से भी कोई भला नहीं

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बदायूं। डीजल और पेट्रोल की कीमतों में एक्साइज ड्यूटी में की गई कमी को किसान नाकाफी बता रहे हैं। किसानों के साथ ही आम लोगों का कहना है कि पहले ही सरकार ने कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ा दी हैं कि 10-12 रुपये की कटौती से कोई फर्क नहीं पड़ता। कृषि कार्यों में डीजल की जरूरत होती है। सिंचाई से लेकर ट्रैक्टर तक का खर्च महंगा हो गया है। किसानों का कहना है कि बढ़ी कीमतों के कारण फसलों की लागत में इजाफा हो रहा है।
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डीजल और पेट्रोल की कीमतें आसमान पर हैं। सरकार ने 10-12 रुपये तक की कमी करके राहत देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन पहले ही कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि यह राहत नाकाफी है।
-यशवीर सिंह
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फसलों की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। किसानों को लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल पा रहा। डीजल के दामों को और कम किया जाना चाहिए। दामों में मामूली कटौती काफी नहीं है।
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-दिगंबर सिंह
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खेतों की जोताई हो या फिर फसलों की सिंचाई, डीजल की जरूरत हर काम में होती है। डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण फसलों की लागत में इजाफा हो रहा है। सरकार को कृषि लागत और उपज का आकलन करके इन चीजों के दाम तय करने चाहिए।
-सचिन श्रीवास्तव
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सरकार किसानों की आमदनी को दोगुना करने का दावा करती है, लेकिन जिस प्रकार से डीजल और पेट्रोल की कीमतों में इजाफा हो रहा है उससे किसान को मुनाफा नहीं नुकसान हो रहा है।
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-प्रमोद साहू
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