कोतवाली परिसर के मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के आठवें दिन राजेंद्र सिंह शास्त्री ने कालीदह की लीला का वर्णन किया। कान्हा और उनके सखा भी बच्चे बने। लीला के दौरान ‘कालीदह पर खेलन आयो रे मेरो नटवर नंदकिशोर’ का भजन गूंजा तो महिलाएं भी झूम उठीं।
सरस कथावाचक राजेंद्र सिंह शास्त्री ने बृज में कृष्ण की लीलाओं को भजन के माध्यम से समझाया। शास्त्री बोले, बृज में गोवर्धन पूजन की शुरूआत ही कृष्ण ने हठ करके शुरू कराई थी। उससे पहले बृजवासी इंद्रदेव का पूजन किया करते थे। गोवर्धन पूजन के दौरान बृजवासियों को इंद्र के कोप का भी सामना करना पड़ा था।
महिलाओं ने भी भजन सुनाए। कथा की व्यवस्थाओं में पुलिस कर्मियों के परिवार की महिलाओं के साथ न्यू लिटिल एंजिल स्कूल की प्रधानाचार्या शशि भार्गव का सहयोग रहा।
पुलिस कर्मी राजेंद्र ने बहाई ज्ञान की गंगा
उझानी। कथावाचक के रूप में व्यास गद्दी पर विराजे राजेंद्र सिंह यदुवंशी शास्त्री कोई और नहीं बल्कि कोतवाली में चालक के पद पर तैनात पुलिस कर्मी हैं। श्रीमद्भागवत के अनगिनत प्रसंगों को कंठस्थ कर चुके राजेंद्र इसके लिए अपनी पत्नी को आदर्श मानते हैं। बोले, ड्यूटी उनकी निष्ठा में शामिल है तो धार्मिक ज्ञान का बखान उन्हें आत्म संतुष्टि प्रदान करता है। इसमें उन्हें साथी पुलिस कर्मियों का भी सहयोग मिलता रहा है।