शहर में बन रहे पहले ओवरब्रिज को लेकर जितनी उत्सुकता से काम में तेजी लाई जाती है, उतनी की बड़ी समस्या आड़े आ जाती है। ओवरब्रिज पर अब रेलवे लाइन के ऊपर 65 फिट के पांच गार्डर डाले जाने हैं।
इसके लिए ऑर्डर दे दिया गया है। इसके लिए जेसीएस कंस्ट्रेक्शन कंपनी, गाजियाबाद को ऑर्डर दिया गया है। इतने लंबे गार्डर यहां तक सड़क मार्ग से आ सकते हैं लेकिन ब्रिज के स्थान पर कम जगह होने के कारण इन्हें पुल पर चढ़ाना मुश्किलों भरा होगा। इस नई बाधा के चलते अब एक महीना काम पूरा होने का समय एक बार एक माह के लिए फिर बढ़ा दिया गया है।
मेन रेल लाइन के ऊपर का काम अंतिम चरण का काम है। दोनो ओर पिलर्स बन जाने के बाद पहले गार्डर डाले जाएंगे। इसके बाद स्लेप का काम होगा।
निर्माण बीच में चलने के कारण इस मार्ग पर आवागमन बंद है। ओवरब्रिज जल्दी पूरा होने की चाह में नागरिक यह कष्ट उठाने को तैयार हैं। सेतु निगम के इंजीनियर यहां पिलर्स खड़े होने के बाद गॉर्डर लाने के लिए परेशान है। सकरी आबादी और बिल्डिंगों के बीच करीब 65 फिट गॉर्डर कैसे पहुंचे इसके लिए मशक्कत चल रही है।
दरअसल, अब जो काम ओवरब्रिज पर होना है काफी चुनौती भरा है। रेलवे लाइन के ऊपर काम में रेलवे के इंजीनियरों को भी हस्तक्षेप है। वहीं सबसे बड़ी अड़चन है कि पिलर्स पर जो पांच गॉर्डर लाकर चढ़ाए जाएंगे वे कैसे चढ़ सकेंगे। इसे लेकर रेलवे की क्रेन मंगाने पर भी मंथन चल रहा है। यह एरिया सकरा है और आसपास बिल्डिंग होने के कारण सीमेंट और लोहे से तैयार गॉर्डर घूमने के लिए जगह भी नहीं है।
इस ओवरब्रिज का निर्माण मई-2013 में शुरू हुआ था। शासन और यहां के सांसद धर्मेंद्र यादव की प्राथमिकता का काम होने के कारण इसकी जल्दी-जल्दी समीक्षा होती रही है। खुद कई बार सांसद इस काम को देख गए हैं। सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार पहले इसके काम समाप्ति की अवधि दिसंबर-14 थी। इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता रहा। अब मार्च तक काम पूरा किए जाने की बात होने लगी है। अभी समय है, उनकी बाधाएं दूर होती रहें तो वह समयावधि में काम समाप्त कर देंगे।
बिजली लाइने भी बन सकती हैं बाधा
ओवरब्रिज का काम रेलवे लाइन के ऊपर शुरू होने जा रहा है। इसमें बिजली की लाइन फिर आड़े आ रही है। सेतु निगम के अभियंताओं ने इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क भी किया लेकिन उन्होंने सामान न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। बिजली विभाग ने 98 लाख रुपये उनसे शिफ्टिंग के लिए थे। गंभीर बात तो यह है कि लाइन तो शिफ्ट कर दी लेकिन जो पोल लगाए हैं, उनसे ओवरब्रिज के निचले रास्ते ऐसे हो गए हैं कि उनसे कार भी पास नहीं हो पाएगी। नगर पालिका परिषद ने भी इस बात का ध्यान नहीं रखा। लोगों को मानना है कि कहीं ऐसा न हो बिजली लाइन दोबारा शिफ्ट करानी पड़े और इसमें फिर भारी रकम खर्च करनी पड़े।
गॉर्डर यहां तक लाना काफी चुनौती पूर्ण काम है लेकिन जेसीएस कंपनी से गॉर्डर खरीदे जा रहे हैं, उस कंपनी से ही इस संबंध में बात होगी। रेलवे के इंजीनियरों के साथ बैठकर इस समस्या को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। ओवरब्रिज का काम मार्च तक पूरा करने का प्रयास होगा। - वीके सैन, डीपीएम, सेतु निगम, बरेली