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Budaun News: फर्जी संस्थान की जांच में खुली जीएनएम के प्रमाणपत्रों की पोल, संचालक पर रिपोर्ट

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उझानी। एसआरएस पैरामेडिकल नाम के संस्थान में जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आया है। पैरामेडिकल में जिन छात्राओं ने जीएनएम किया, उन्होंने प्रमाणपत्र मिलने के बाद शक होने पर जांच कराई तो वह फर्जी निकले। कोर्स कराने के नाम पर उनसे दो- दो लाख रुपये भी वसूले गए।
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फर्जीवाड़े का मामला कादरचौक क्षेत्र के गांव बमनौसी निवासी राकेश कुमार सिंह ने उजागर किया है। राकेश के मुताबिक, उनकी बेटी शिखा और रुचि ने उझानी की पंजाबी कॉलोनी में संचालित एसआरएस पैरामेडिकल में जीएनएम का कोर्स किया। शिखा और रुचि के साथ ही कई अन्य छात्राओं ने भी कोर्स किया था। प्रत्येक से एक-एक लाख रुपये भी वसूले गए। कोर्स पूरा होने के बाद सभी को प्रमाणपत्र भी सौंपे गए।
शिखा और रुचि के प्रमाणपत्रों पर पिता राकेश को शक हुआ तो उन्होंने अपने परिचितों के जरिये जांच कराई। राकेश को जब यह पता लगा कि प्रमाणपत्र फर्जी हैं तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाद में राकेश ने एसएसपी कार्यालय में पेश होकर फर्जीवाड़े के आरोपी पैरामेडिकल के संचालक के खिलाफ कार्रवाई की गुहार भी लगाई।
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उन्होंने पुलिस को बताया कि संचालक ने जिन छात्राओं को जीएनएम के प्रमाणपत्र सौंपे हैं, वह मान्य नहीं हैं। संचालक ने अपने नाते-रिश्तेदारों की बेटियों को भी नहीं बख्शा है। उनसे भी वसूली करके फर्जी प्रमाणपत्र सौंपे हैं। उन्होंने संचालक से शिकायत की तो उसने उन्हें किसी संगीन केस में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने एसआरएस पैरामेडिकल के संचालक कोतवाली क्षेत्र के गांव नसरूल्लापुर निवासी प्रदीप यादव पुत्र रामवीर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

जीएनएम है एक डिप्लोमा कोर्स
जीएनएम साढ़े तीन साल (3 साल की पढ़ाई और 6 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप) का एक डिप्लोमा कोर्स होता है, जो विद्यार्थियों को चिकित्सा, मरीज की देखभाल और प्रसूति विज्ञान में प्रशिक्षित करता है।


किराये के भवन में संचालित था एसआरएस पैरामेडिकल
एसआरएस पैरामेडिकल की पोल खोलने वाले बमनौसी निवासी राकेश कुमार सिंह ने रिपोर्ट में सिर्फ पंजाबी कॉलोनी का जिक्र किया है। कॉलोनी में नसरूल्लापुर निवासी प्रदीप यादव ने संस्थान कहां खोला था, पते का उल्लेख नहीं है। इसके विपरीत जानकार बताते हैं कि कॉलोनी में एक किराये के भवन में कोचिंगनुमा सेंटर खोला गया था। कागजों में भले ही उसका नाम एसआरएस पैरामेडिकल रहा हो, लेकिन वह वर्ष- 2024 से इस साल जनवरी महीना तक चला। उस वक्त शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंची थी।

फर्जीवाड़े का मामला पुराना है। शिकायत आई थी। प्रारंभिक जांच के बाद कोतवाली पुलिस ने एसआरएस पैरामेडिकल के संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - सुनील कुमार सिंह, सीओ
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