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मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में अब भी लापरवाही, दावा यह कि सब ठीक है

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जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड के पास जलाया गया कूड़ा। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। सरकारी और निजी अस्पताल बॉयो मेडिकल वेस्ट (मेडिकल कचरे) का सही ढंग से निस्तारण नहीं कर रहे। निस्तारण के नाम पर सिर्फ औपचारिकता की जा रही है। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारी अधिकारी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी दावा करते हैं कि मेडिकल वेस्ट का अच्छे ढंग से निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए एक निजी कंपनी से करार भी है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर उतना गंभीर नहीं है। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण भी सवालों के घेरे में है। जिला अस्पताल में तो आइसोलेशन वार्ड के पास मेडिकल कचरा जलता हुआ भी देखा जा सकता है। जिले में चिकित्सा इकाइयों की बात करें तो जिला और जिला महिला अस्पताल के साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज भी है। 112 निजी नर्सिंग होम और 20 रजिस्टर्ड पैथालॉजी लैब हैं। इसके अलावा 15 सीएचसी, 43 पीएचसी, पांच अर्बन स्वास्थ्य केंद्र और 200 से ज्यादा उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। दो निजी और दो सरकारी ब्लड बैंक भी हैं। यहां से भी मेडिकल कचरा निकलता है। इसका निस्तारण किस तरह होता है अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं है। हालांकि, वह सही ढंग से मेडिकल कचरे का निस्तारण होने का दावा करते हैं।
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यह है व्यवस्था
एनजीटी का आदेश है कि बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सभी चिकित्सा इकाइयां प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में पंजीयन कराकर एनओसी लेें। लेकिन स्वास्थ्य महकमा निजी चिकित्सा इकाइयों को लेकर सख्ती नहीं दिखा रहा। यही नहीं सरकारी चिकित्सा संस्थानों में भी बुरा हाल है। बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट 2018 के तहत अगर किसी अस्पताल में खुले में सिरिंज, पट्टी सहित दूसरे मेडिकल वेस्ट मिलते हैं तो संबंधित अस्पताल के डॉक्टर तथा पैरामेडिकल स्टाफ पर कार्रवाई की जा सकती है। उनके खिलाफ मोटा जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।
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कई नर्सिंगहोम, पैथोलॉजी लैब चल रहे बिना पंजीकरण के
जिले में बड़ी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन के नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब चल रहीं हैं। झोलाछाप की संख्या भी कम नहीं है। इनके यहां से निकलने वाले मेडिकल कचरे को आबादी वाले इलाकों में फेंक दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ती। पिछले दिनों सहसवान में एक फर्जी नर्सिंग होम सील किया गया था। 13 मई को दातागंज में बरेली रोड पर एक नर्सिंग होम में नवजात की मौत के बाद हंगामा हुआ तो पता लगा कि वह बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा है। नोटिस के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम जब वहां पहुंची तो संचालक यहां से सारा सामान समेट कर फरार हो चुका था। यही हाल निजी पैथालॉजी लैब का भी है।
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मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को निजी कंपनी से है करार : सीएमएस
जिला अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण हो रहा है। एक निजी कंपनी से इसके लिए अनुबंध किया गया है। लाल, नीली और पीली पॉलिथीन में अगल-अलग तरह का बायो मेडिकल वेस्ट एकत्र किया जाता है। निजी कंपनी का वाहन रोज आकर इसे ले जाता है। आईसोलेशन वार्ड के बाहर सामान्य कचरे को रखा जाता है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
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निजी अस्पतालों ने भी कर रखा है अनुबंध : डॉ. शरद
ज्यादातर निजी अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए निजी कंपनी के साथ करार है। स्वास्थ्य विभाग को भी आईएमए की ओर से ही मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए निजी कंपनी से करार करने का सुझाव दिया गया था। जिले में जो भी रजिस्टर्ड नर्सिंग होम हैं वहां बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण हो रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन चलने वाले क्लीनिक, नर्सिंगहोम के बारे में जानकारी नहीं है।
-डॉ. शरद गुप्ता, पूर्व सचिव आईएमए
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स्वास्थ्य विभाग जब किसी नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन करता है उस वक्त संबंधित से बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के संबंध में भी शपथ पत्र समेत अन्य कागजात लिए जाते हैं। जिले में जो भी आईएमए से जुड़े डॉक्टर हैं उनका बायो मेडिकल बेस्ट के निस्तारण के लिए निजी कंपनी से अनुबंध है। आईएमए से अलग के डॉक्टरों के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती।
-डॉ. नीता चंदेल, सचिव आईएमए
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मेडिकल कॉलेज में अब इधर-उधर नहीं रखना होगा बायो वेस्ट, बनाया गया अलग कमरा
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब तक बायो वेस्ट रखने के लिए कोई एक जगह निश्चित नहीं थी। ऐसे में वार्डों से निकलने वाले बायो वेस्ट को स्टाफ यहां वहां रख दिया करता था। कई बार स्टाफ की लापरवाही की वजह से यह इधर-उधर भी पड़ा रह जाता था। अब इसके लिए यहां अलग से कमरा बनाया गया है।
गुन्नौरा वाजिदपुर में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज का अब भी निर्माण चल रहा है। हालांकि यहां पर ओपीडी काफी पहले शुरू हो चुकी है, ऐसे में यहां पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। जिसकी वजह से वार्डों से रोजाना काफी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट एकत्र हो जाता है। इसको स्टाफ यहां वहां रख देता था, बंदर भी इसको फैला दिया करते थे। ऐसे में बायो वेस्ट ले जाने वाले स्टाफ को परेशानी होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
वार्डों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को मेडिकल कॉलेज परिसर में बने कक्ष में रखा जाएगा। वहां से बायो मेडिकल वेस्ट ले जाने वाला वाहन उसको भरकर ले जाएगा। ऐसे में बायो मेडिकल वेस्ट फैलने का खतरा नहीं रहेगा। प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि कक्ष लगभग तैयार है कुछ काम रह गया है, वह भी जल्द पूरा हो जाएगा।
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