बदायूं। अवैध पैथोलॉजी लैब और झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा अब सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं रहेगा। तहसील स्तर पर एसडीएम और सीओ भी इनकी निगरानी करेंगे। शासन के निर्देश पर कार्रवाई के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। तहसील स्तर पर एसडीएम के निर्देशन में कार्रवाई की जाएगी। अवैध लैब और झोलाछाप की मनमानी पर रोक के लिए प्रशासनिक स्तर पर यह पहली बार बड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि, इसके बाद कितना अंकुश लगेगा यह वक्त ही बताएगा।
जिले में अवैध पैथोलॉजी लैब के साथ झोलाछाप का जाल फैला हुआ है। अवैध रूप से नर्सिग होम तक संचालित हो रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी कुछ नहीं होता। खुद स्वास्थ्य विभाग भी इन आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं करता कि जिले में कितनी पैथोलॉजी लैब और कितने रजिस्टर्ड नर्सिंग होम, क्लीनिक हैं। संक्रामक रोगों के मौसम में इनकी मनमानी का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। हर वर्ष मलेरिया के मौसम में अवैध लैब झोलाछाप के कहने पर धड़ल्ले से लोगों को डेंगू की पुष्टि करती हैं और गलत इलाज के चक्कर में बेवजह लोगों की जान जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री की गंभीरता के बाद डीएम दीपा रंजन ने जिले में अब अवैध लैब और झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में टीमों का गठन किया है। संबंधित सीओ और चिकित्साधीक्षक भी टीम का हिस्सा रहेंगे। यह टीमें प्रतिदिन कार्रवाई की रिपोर्ट डीएम और सीएमओ को देंगी।
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अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर भी होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में पंजीकृत पैथोलॉजी लैब, डॉक्टर, नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर का सही आंकड़ा ही नहीं है। एसीएमओ डॉ. मंजीत सिंह झोलाछाप नियंत्रण सेल की जिम्मेदारी संभालते हैं। झोलाछाप की पकड़ सीएमओ ऑफिस तक है। लैब हों या फिर अल्ट्रासाउंड सेंटर, छापे तो मारे जाते हैं, लेकिन कार्रवाई से पहले सब कुछ रफा-दफा कर दिया जाता है। हर मौसम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से झोलाछाप, अवैध लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर्स को नोटिस जारी किए जाते हैं। थोक के भाव एफआईआर भी कराई जाती हैं लेकिन विभाग के अफसर इनके खिलाफ कार्रवाई की पैरवी नहीं करते और यह नेटवर्क चलता रहता है।
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झोलाछाप के पंजीकरण में हो चुकी शासन स्तर से कार्रवाई
झोलाछाप के पंजीकरण में भी शासन स्तर से कार्रवाई हो चुकी है। करीब दो साल पहले डॉ. दीपक सिंह तोमर ने 20 लोगों के पंजीकरण डॉक्टर के रूप में कर लिए थे। इनके पास वैध डिग्री नहीं थी। शासन स्तर पर शिकायत के बाद डॉ. दीपक तोमर को हटा दिया गया। 20 पंजीकरण भी रद्द कर दिए गए। गौर करने की बात यह है कि यह फर्जी पंजीकृत छोलाछाप अब भी डॉक्टर के रूप में क्लीनिक चला रहे हैं।
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यह बात सही है कि गली-गली लैब और झोलाछाप हैं। अब डीएम ने तहसील स्तर पर इनके खिलाफ कार्रवाई को एसडीएम के निर्देशन में टीमों का गठन किया है। तहसील स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से चिकित्सा पेशा करने वालों को जेल भेजा जाएगा।
- डॉ. दीपक वार्ष्णेय, सीएमओ