जिला अस्पताल में आयुष विंग के पास बना तालाब। संवाद
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बदायूं। तापमान में मामूली गिरावट आने के साथ ही जिले में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। गौर करने वाली बात यह है कि जिला अस्पताल परिसर में ही चार दिन में डेंगू के चार रोगी मिले चुके हैं। इसके अलावा शहर के पटेल नगर और जालंधरी सराय में भी डेंगू के रोगी मिले हैं। दरअसल, जिला अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर मच्छरों की भरमार है।
बदायूं जिला मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क है। आमतौर पर मलेरिया का सीजन अगस्त से नवंबर तक माना जाता है। इनमें भी सितंबर मध्य से नवंबर तक डेंगू का प्रकोप रहता है। मलेरिया और फैल्सीपेरम के रोगी तो पहले से ही निकल रहे हैं। अब डेंगू के रोगी भी मिलने लगे हैं। अब तक 25 से ज्यादा डेंगू के रोगी मिल चुके हैं। इनमें भी चार रोगी जिला अस्पताल परिसर में ही मिल चुके हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी और जलभराव के कारण ऐसा हो रहा है। आइसोलेशन वार्ड के पास आयुष विंग के सामने तो तालाब में मच्छरों की नर्सरी पनप रही है। कई अन्य स्थानों पर भी जलभराव है। आरओ प्लांट के आसपास भी पानी भरा रहता है।
मलेरिया विभाग के पास फॉगिंग का बजट नहीं है और नगर पालिका ने अब तक अस्पताल परिसर में फॉगिंग कराना जरूरी नहीं समझा है। शहर के पटेल नगर, जालंधरी सराय और चौधरी सराय में भी डेंगू के रोगी मिल चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां भी फॉगिंग नहीं कराई गई है। गनीमत यह है कि अब तक डेंगू से कोई जान नहीं गई है।
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मलेरिया विभाग के पास पायराथ्रेम तो हैं लेकिन बजट न होने से फॉगिंग नहीं कराई जा पा रही है। आवश्यकता के अनुरूप डीडीटी के घोल का छिड़काव कराया जा रहा है। शहर में फॉगिंग नगर पालिका की भी जिम्मेदारी है।
-योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी