बदायूं। जिले में दो सौ से ज्यादा गांवों में वायरल फीवर का प्रकोप है। जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के मामले 40 के पार हो गए हैं। प्रतिदिन औसतन मलेरिया के 20 नए रोगी मिल रहे हैं। सबसे ज्यादा सालारपुर, जगत, समरेर और दातागंज में खराब है। रविवार को मलेरिया विभाग ने चार ब्लॉक के 20 से ज्यादा तालाबों में गम्बूजिया मछलियां छुड़वाई हैं। यह मछलियां मच्छरों और उनके लार्वा को भोजन बनाती हैं।
मलेरिया के लिहाज से जिले के चार ब्लॉकों के 100 से ज्यादा गांव हाईरिस्क श्रेणी में आते हैं। साल 2019 में जिले में मलेरिया का भयंकर प्रकोप रहा था। इस वर्ष बदायूं मलेरिया के प्रकोप के मामले में प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहा था। इस दौरान 300 से ज्यादा लोगों की मौत भी हुई थी। 2020 में शासन स्तर से मॉनीटरिंग के बावजूद जिले में मलेरिया के 18 हजार से ज्यादा मामले सामने आए थे। इस वर्ष भी मलेरिया का सीजन शुरू होने के साथ ही जिले में मलेरिया का प्रकोप शुरू हो गया है। सालारपुर ब्लॉक में सब तब सबसे ज्यादा करीब 20 मामले फैल्सीपेरम मलेरिया के मिल चुके हैं। सालारपुर, जगत, समरेर और दातागंज ब्लॉक के दो सौ से ज्यादा गांवों में इन दिनों वायरल फीवर का प्रकोप है। जहां भी लोगों की जांच की जा रही है वहां वायरल फीवर पीड़ितों में काफी संख्या में मलेरिया के रोगी मिल रहे हैं। रविवार को भी मलेरिया के 18 रोगी मिले। इनमें एक फैल्सीपेरम मलेरिया का रोगी शामिल है।
वायरल फीवर और मलेरिया के प्रकोप के बीच इन दिनों सरकारी अस्पतालों के साथ निजी डॉक्टरों के यहां भी मरीजों की लाइन लग रही हैं। इस बीच गांव-देहात में झोलाछापों की भी चांदी हो रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग बुखार प्रभावित गांवों में जांच कराने और दवाएं वितरण का दावा कर रहा है, लेकिन ज्यादातर गांवों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच रहीं।
मलेरिया के बाद अब डेंगू के प्रकोप का खतरा बढ़ा
बदायूं। जिले में अब तक डेगू का कोई रोगी सामने नहीं आया है, लेकिन डेंगू के प्रकोप का खतरा बना हुआ है। पिछले वर्ष काफी संख्या में डेंगू के रोगी मिले थे। कई लोगों की डेंगू से मौत भी हो गई थी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम का कहना है कि मलेरिया का मच्छर रात में जबकि डेंगू का मच्छर दिन में डंक मारता है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है। ऐसे में सभी को सावधानी बरतने की जरूरत है कि वह अपने घरों या आसपास पानी जमा न होने दें।
दवाओं की कोई कमी नहीं है। बुखार प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर लोगों की जांच कराई जा रही है। मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। तालाबों में गम्बूजिया मछलियों को छुड़वाया जा रहा है। लोगों को भी सावधानी बरतने और मलेरिया से बचाव के उपाय करने की जरूरत है।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ