बदायूं। जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट अगले साल तक चालू हो जाएगी। शासन स्तर से दिशा निर्देश मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जगह चिह्नित कर ली है। जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं। फाइल शासन को भेज दी गई है। डायलिसिस यूनिट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल (पीपीपी) पर बनेगी। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद यूनिट लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
करीब दो साल पहले तत्कालीन सीएमएस डॉ. बीबी पुष्कर के कार्यकाल में जिला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस करने के लिए कोशिशें शुरू की गई थीं। इसके बाद अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन की सुविधा शुरू हो गई। डायलिसिस यूनिट का प्रस्ताव भी शासन स्तर पर लंबित था। पिछले वर्ष डायलिसिस यूनिट के लिए उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण भी किया। इसके बाद स्वास्थ्य निदेेशालय की ओर से हीमो डायलिसिस यूनिट की स्थापना के जिला अस्पताल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई। अस्पताल प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेज दी थी।
इसमें कहा गया था कि यूनिट की स्थापना के लिए अस्पताल परिसर में मानकों के अनुसार कोई भवन नहीं है। हालांकि, भवन निर्माण के लिए जगह उपलब्ध है। भवन न होने के कारण शासन ने उस वक्त हाथ खींच लिए थे। अब अस्पताल प्रशासन के पास भवन के साथ जगह भी है। इसे चिह्नित कर लिया गया है।
इसी वर्ष अप्रैल से डायलिसिस यूनिट के लिए फिर से प्रक्रिया शुरू की गई। जिला अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए संबंधित लिखा पढ़ी और कागजी कार्यवाही को पूरा करने के बाद फाइल निदेशालय भेज दी है। नए सिरे से शुरू की गई प्रक्रिया में अस्पताल प्रशासन ने मानक के अनुरूप भवन के साथ नए भवन के लिए जमीन उपलब्धता की बात कही है। यूनिट के लिए अस्पताल परिसर में तीन स्थान चयनित किए गए हैं। इसके अलावा पुरानी इमरजेंसी का भवन भी चिह्नित किया गया है।
भवन होता तो पहले ही लग जाती यूनिट
- जिला अस्पताल को हीमो डायलिसिस यूनिट को मंजूरी न मिलने की एक वजह बजट भी माना जा रहा है। डायलिसिस यूनिट की स्थापना का खर्च करीब 15 लाख रुपये है। अगर जिला अस्पताल में मानक के अनुसार भवन होता तो यूनिट के लिए मंजूरी दो साल पहले ही मिल सकती थी। जिला अस्पताल में भवन निर्माण पर ही कम से कम 80 लाख रुपया खर्च आएगा। ऐसे में दो साल पहले जिला अस्पताल को डायलिसिस यूनिट नहीं मिल सकी थी।
किडनी रोगियों को आसानी से मिल सकेगा इलाज
- जिले में किडनी संबंधी रोगियों की बड़ी संख्या है। यहां किसी निजी अस्पताल में भी डायलिसिस यूनिट नहीं है। ऐसे में मरीजों को बरेली और लखनऊ की दौड़ लगानी होती है। शहर के किडनी रोग पीड़ित एक व्यक्ति ने बताया कि निजी अस्पताल में एक बार की डायलिसिस पर करीब चार हजार रुपये का खर्च आता है। रोग के अनुसार सप्ताह में एक बार तो कई बार सप्ताह में दो बार तक डायलिसिस करानी होती है। सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस का खर्च न के बराबर आता है। बरेली के जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट है, लेकिन बंद पड़ी है। ऐसे में निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी है।
बदायूं जिला अस्पताल में हीमोडायलिसिस यूनिट प्रस्तावित है। इस संबंध में निदेशालय को रिपोर्ट भी भेजी गई थी। डायलिसिस यूनिट के लिए मानक के अनुसार भवन व अन्य सहूलियतें उपलब्ध हैं। पीपीपी मॉडल पर यूनिट की स्थापना होनी है। शासन की योजना हर वर्ष कुछ अस्पतालों को डायलिसिस यूनिट देने की है। उम्मीद है कि जिला अस्पताल को अगले वर्ष तक डायलिसिस यूनिट चालू हो जाएगी।- डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस