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Budaun News: हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर पड़े ताले...210 सीएचओ पर प्रति माह खर्च होते हैं 63 लाख

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रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद
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बदायूं। जिले में स्वास्थ्य महकमे के रिकॉर्ड में 234 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। ग्रामीण इलाकों में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के लिए ये सेंटर बनाए गए हैं, पर इनकी खुद की हालत खराब है। इनमें 24 सेंटरों पर सीएचओ नहीं हैं। हालांकि विभाग द्वारा जिले के सेंटरों पर 210 सीएचओ की तैनाती है। सीएचओ समय पर नहीं पहुंचते, वहीं अधिकांश हेल्थ सेंटर बंद पड़े रहते हैं। जबकि, प्रति माह प्रत्येक सीएचओ पर 30 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं।
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शुक्रवार को नौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की पड़ताल की गई। इसमें आठ पर ताले लगे थे। वहीं, एक पर 11 बजे सीएचओ पहुंचीं थीं। दहगवां के रसूलपुर कलां, परमानन्दपुर, नाधा,कोठा, करियामई, अल्लयपुर, मियोन, जरीफनगर के सिलहरी, आदि हेल्थ सेंटरों के दिन भर ताले ही नहीं खुले। वहीं, अधिकांश सेंटरों पर पानी और बिजली ही नहीं थी। कुछ सेंटरों के सामने तो गंदगी के अंबार लगे रहे, इससे सेंटर तक पहुंचा ही नहीं जा सकता। पड़ताल में मात्र अलापुर क्षेत्र में चितौरा सेंटर पर सीएचओ दवा देती मिलीं।


न पानी न बिजली, नहीं खुलता सेंटर
दहगवां सीएचसी के सब सेंटर सिलहरी पर दिन भर ताले लगे रहे। सेंटर के सामने बड़ी-बड़ी घास यह बता रही है कि यह सेंटर कभी खुलता ही नहीं है। यहां के रहने वाले दिनेश ने बताया कि कभी कोई सेंटर पर नहीं आता है। जब कोई अधिकारी आता तो यहां सीएचओ आ जाते हैं। महीनों से सफाई नहीं हुई है। न पानी है और न ही बिजली की व्यवस्था।
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बोर्ड लगाकर छोड़ा, हेल्थ सेंटर का पता नहीं
इस्लामनगर क्षेत्र के गांव अलीपुर चाचीपुर में विभाग ने आरोग्य मंदिर का बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन यहां हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का पता नहीं चल सका है। गांव के लोगों ने बताया कि यहां स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां कोई सेंटर नहीं है।


सेंटर पर कभी नहीं आते सीएचओ
दहगवां क्षेत्र के रसूलपुर कलां में बने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर शुक्रवार को पूरे दिन ताले लटके रहे। यहां रहने वाले राजेश समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि जब दो साल पहले सेंटर बना था, तब एक दो महीने तक एक-दो लोग कभी-कभी आ जाते थे, लेकिन करीब 18 माह से यहां कोई नहीं आया है।


दिन भर लटके रहे ताले, सेंटर पर फैली गंदगी
आसफपुर क्षेत्र के गांव सिसरिका के सेंटर पर सुबह 8.00 बजे देखा तो सेंटर पर ताले लगे थे। दोपहर 12 बजे, दो बजे भी ताले लटके मिले। गांव के ग्रीश ने बताया कि यहां कभी ताला नहीं खुलता है तो सफाई कहां से हो जाएगी। दवा लेने 20 किलोमीटर आसफपुर जाना होता है।


परिसर की गंदगी बयां कर रही कि कभी नहीं खुलता है सेंटर
जरीफनगर क्षेत्र के गांव नाधा में बने सेंटर पर इस कदर गंदगी है, जिसे देखते ही पता लग रहा है कि यहां सालों से सेंटर को खोला ही नहीं गया है। पोप सिंह ने बताया यहां तो केवल जुआरी-शराबी ही दिखाई देते है, कोई डॉक्टर यहां नहीं आता।

सेंटर तो बना कभी नहीं आते सीएचओ
दहगवां के कोठा गांव में बने सेंटर पर सीएचओ नवीन कुमार की तैनाती है। लेखराज ने बताया कि सेंटर पर कभी सीएचओ नहीं आते। अन्य लोगों का कहना था कि कभी इसके ताले नहीं खुले हैं।


10 बजे तक नहीं खुल पाते है सीएचओ के ताले
बिल्सी। विकास खंड अंबियापुर क्षेत्र के गांव सिध्दपुर चित्रसैन में स्थित हेल्थ वेलनेस सेंटर के गेट का ताला शुक्रवार को सुबह 10 बजे तक नहीं खुल सका। जिसपर प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ.सर्वेश कुमार ने यहां तैनात सीएचओ का वेतन काटने के निर्देश जारी कर दिए है। उन्होंने बताया कि उक्त केंद्र के संबंध में ग्राम प्रधान समेत ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की है कि उक्त अक्सर बंद रहता है।

यह है सीएचओ की भूमिका
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आने वाले गंभीर मरीजों की समस्याओं को सुनकर सर्जन या फिर फिजीशियन से बीमारी के बारे में ऑनलाइन चर्चा करेंगे। इसके बाद डॉक्टर ग्रुप पर ही संबंधित बीमारियों की दवाएं लिखकर भेजेंगे जो मरीजों को दी जाएंगी। गंभीर मरीज होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किए जाने की व्यवस्था है।

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर लगभग सभी सीएचओ की तैनाती हो चुकी है। 24 सेंटरों पर भी सीएचओ की डिमांड की गई है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जहां भी अव्यवस्थाएं हैं उनको दूर किया जा रहा है। नए भवन बनाए जा रहे हैं ताकि उनको वहां शिफ्ट किया जा सके।अगर सीएचओ नहीं पहुंच रहे हैं तो गलत है। जांच कराके कार्रवाई कराएंगे। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

रसूलपुर कलां के सेंटर पर लगे ताले। संवाद

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