फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budaun News: वीभत्स घटना, ऐसा लगता है कि अभियुक्त कानून का भय नहीं

Fri, 24 May 2024 05:31 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन
बदायूं। न्यायाधीश सौरभ सक्सेना ने अपने फैसले में साक्ष्यों एवं उच्चतम न्यायालय के शीलम अलीस बनाम मध्य प्रदेश राज्य में दिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए लिखा है कि अभियुक्त ने अत्यंत वीभत्स तरीके से अपनी पत्नी को जान से मारने की नीयत से उसके पेट व छाती पर धारदार हथियार से प्रहार किया है। इससे महिला का पेट फट गया। उसकी छोटी आंत भी बाहर आ गई। आठ महीने के शिशु का गर्भपात हो गया था। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्त को कानून का भय नहीं है।
विज्ञापन

अदालत में सुनवाई के दौरान एडीजीसी ने अवगत कराया कि पत्नी के पेट में बेटा है या बेटी यह देखने के लिए पति पन्नालाल ने पत्नी के पेट और छाती पर वार किए। न्यायाधीश ने भी इसे माना। एडीजीसी ने यह भी कहा कि मौखिक साक्ष्य और चिकित्सकीय साक्ष्य मेल खाते हैं। पन्नालाल को उसके किए की सजा मिलनी चाहिए। अपराध किसी संदेह के परे है।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी आरोपी को बचाने का भरसक प्रयास किया। तर्क दिया कि उसे झूठा फंसाया गया। यह भी कहा कि ससुराल के लोग उसका मकान हड़पना चाहते हैं। यह तर्क नहीं चला तो फिर बेटियों के पालन-पोषण और गरीबी का हवाला देकर पुत्रियों के विवाह कराए जाने के लिए राहत मांगी गई। यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसलिए कम से कम सजा दी जाए। न्यायाधीश इससे भी सहमत नहीं हुए। घटना को वीभत्स मानते हुए पन्नालाल को दोषी करार दिया।
विज्ञापन

सजा के बाद दोषी का परिवार उदास हो गया। दोषी को जेल भेजा गया तो उसके परिजन रोने लगे। वहीं, पत्नी और मायके पक्ष के लोगोंं ने फैसले को सही हठराया।
-



इन धाराओं में हुई है सजा
आईपीसी की धारा 307 (जानलेवा हमला)।
आईपीसी की धारा 313 (इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराना)
(अदालत के फैसले के मुताबिक दोनों मामलों में दोष सिद्ध हुआ। जानलेवा हमले में आजीवन कारावास के साथ 40 हजार रुपये जुर्माना और इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराने पर हुई दस साल की सजा के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना लगा है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी)
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें