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कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ी आस्था.. पुलिस की बंदिशों को तोड़ घाट पर गूंजे हर-हर गंगे के जयकारे

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उझानी/कछला। गंगा स्नान के लिए प्रशासन सामाजिक दूरी बनाने के लाख इंतजाम किए पर लोगों की आस्था ने सब तार तार कर दिए। पहले बाईपास फिर बितरोई मोड़ और किसी तरह आगे निकले तो कछला चौराहे पर पुलिस ने रोक लिया। गंगा स्नान के लिए कछला घाट तक पहुंचने का कोई उपाय नजर नहीं आया तो श्रद्धालुओं और पुलिस के बीच लुकाछिपी का जो दौर शुरू हुआ, उसे देख लगा कि आस्था के आगे कोरोना का डर छूमंतर हो चुका है। वाहन सवार श्रद्धालुओं में किसी ने बरात में जाने तो कोई शामिल होकर घर लौटने का बहाना बनाकर पुलिस को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। जब कुछ न सूझा तो वाहन खड़ा कर पैदल ही चल दिए।
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कार्तिक पूर्णिमा पर कछला गंगाघाट पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं में से अधिकतर को कमोबेश ऐसे ही दौर से गुजरना पड़ा। कोरोना को लेकर सरकार की गाइड लाइन का पालन कराने के लिए पुलिस ने जो व्यवस्थाएं कीं, उसी के तहत उझानी और मुजरिया रोड से लेकर घाट तक करीब आधा दर्जन स्थानों पर बैरियर लगाए गए। बरेली-मथुरा हाईवे पर मंडी समिति मोड़, वितरोई तिराहा, कछला चौराहा तो मुजरिया चौकी पर भी पुलिस ने सोमवार तड़के से ही वाहनों को रोकना शुरू कर दिया। पुलिस का फोकस कार और बाइक सवार श्रद्धालुओं पर रहा। श्रद्धालुओं में मुजरिया निवासी हरीओम और बिल्सी के गांव नैथुआ के नेमचंद्र ने बताया कि बाइक से घाट तक पहुंचने के लिए उन्हें दो बार रास्ते में ही पुलिस कर्मियों का सामना करना पड़ा।
बदायूं निवासी सुरजीत कुमार तो पूरे परिवार के साथ कार से गंगा स्नान को निकले। हालांकि वह आस्था की डुबकी लगाकर ही लौटे लेकिन उनका कहना है कि वितरोई मोड़ पर बैरियर पर मौजूद पुलिस कर्मियों के सामने बताना पड़ गया कि वह शादी में शामिल होकर कासगंज के लिए लौट रहे रहे हैं। सुरजीत की तरह ही तमाम श्रद्धालुओं ने पुलिस कर्मियों को चकमा देकर गंगा स्नान किया। इसके विपरीत कछला चौराहे पर रोके गए वाहनों में मौजूद लोगों ने तो पैदल ही घाट तक सफर तय किया। इसी तरह से गंगाघाट पर दोपहर तक आस्था का सैलाब उमड़ता रहा। हालांकि यह भीड़ सुबह 11 बजे के बाद उमड़ना शुरू हुई।
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राजस्थान से आए गंगा नहाने
उझानी। कछला गंगाघाट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इनमें करीब 30 फीसदी संख्या कासगंज जिले की ओर की रही। कासगंज जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से सोरों कोतवाली और पंखियानगला वाले छोर की पुलिस चौकी के सामने ही श्रद्धालुओं को रोककर उन्हें लौटाने के लिए बैरियर लगाए गए थे लेकिन पड़ोसी जिले की पुलिस ने ज्यादा मशक्कत नहीं की। कासगंज की तरफ से घाट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में राजस्थान के महिला-पुरुष भी शामिल नजर आए। इसी के चलते सैकड़ों श्रद्धालुुुओं ने घाट से हटकर भी स्नान किया। पुलिस चौकी के आसपास वाहन रोके जाने से दो-तीन बार जाम का भी माहौल बना।
घाट पर दुकानें भी लगीं
उझानी। कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल ही गंगाघाट पर सैकड़ों की संख्या में दुकानें लगती हैं। प्रसाद, शृंगार के सामान, बच्चों के खिलौने और खानपान की वस्तुओं की दुकानें हालांकि ज्यादा नहीं लगी लेकिन प्रसाद के अलावा अधिकतर दुकानों पर ग्राहकों की कोई खास संख्या नहीं दिखी। शृंगार का सामान बेचने वाले दुकानदार रामप्रसाद ने बताया कि उम्मीद थी कि कोरोना संक्रमण का ग्राफ गिरने की वजह से मेला में लोग पहुंचेंगे लेकिन दुकानदारी चार-छह हजार रुपये में ही सिमट गई। इसकी एक वजह यह भी रही कि जो लोग गंगा स्नान करने पहुंचे, उन्हें पुलिस की बंदिशों को लेकर घूमने का मौका ही नहीं मिल पाया।
ककोड़ा में शाम तक पहुंचते रहे लोग
कादरचौक। मुख्य स्नान पर्व पर गंगा तट पर श्रद्धालुओं को पहुंचने से रोकने के लिए सोमवार को सात पुलिस टीमों को लगाया गया था। इसके बावजूद पुलिस की सख्ती पर आस्था भारी पड़ी। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालु पहुंचते रहे और गंगा में डुबकी लगाते रहे। ककोड़ा के अलावा यहां कई अन्य स्थानों पर भी श्रद्घालुओं ने अस्थाई घाट बना लिए।
मेला ककोड़ा का इतिहास करीब तीन सौ साल पुराना है। कोरोना संक्रमण के खतरे के मद्देनजर इस बार शासन ने मेला के आयोजन की अनुमति नहीं दी है। मेला ककोड़ा में कई दिन तक श्रद्घालु और साधु-संत कल्पवास को पहुंचते थे। इस बार कल्पवास नहीं हो रहा है। हालांकि, कार्तिक पूर्णिमा पर काफी संख्या में लोगों ने ककोड़ा गंगा घाट पहुंच कर गंगा में डुबकी लगाई। पुलिस सख्ती जरूर दिखाती रही, लेकिन सख्ती का असर कम ही हुआ। ककोड़ा के अलावा आस-पास के गांवों जोरी नगला, राम सहाय नगला, मुंशी नगला में भी श्रद्धालुओं ने अस्थाई घाट बना लिए। पुलिस से बच कर यहां गंगा में डुबकी लगाई। गनीमत रही कि गंगा तट पर बिना किसी तैयारी के स्नान के बाद भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है।
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