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‘समय को देखते हुए नाकाफी हैं न्यूनतम समर्थन मूल्य’

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बदायूं। कृषि बिल कानून का किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां भी किसान संगठनों समेत विपक्षी दल आंदोलन कर चुके हैं, साथ ही इसका विरोध भी किया जा रहा है। भाकियू इस संबंध में धरना प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी दे चुकी है। किसानों का कहना है कि आज जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों को दिया जा रहा है, वह समय को देखते हुए नाकाफी है। उस पर बिल पारित कर किसानों की कमर तोड़ने का काम कर दिया गया है। इस बिल से किसानों को नहीं बल्कि उद्योगपतियों को लाभ होगा।
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केंद्र सरकार की ओर से पिछले दिनों कृषि बिल पारित किया गया था। जिसमें लेकर किसान संगठन शुरू से ही विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये बिल किसानों के हित को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। इस बिल से किसानों को बिल्कुल भी फायदा नहीं होने वाला है। इस बिल की वजह से छोटे और मध्यम वर्ग के किसान पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन भी इस बिल का पूरी तरह से विरोध कर रही है। किसानों का कहना है कि इस कृषि बिल में बड़े उद्योगपति को फायदा होता नजर आ रहा है। नए प्राविधान के तहत व्यापारी कितना भी भंडारण कर सकते हैं। ऐसे में कालाबाजारी होने के भी ज्यादा उम्मीद रहेगी।
कौन से बिल हैं
1 कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल
2 आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल
3 मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल।
क्यों हो रहा है विरोध-
बिल का विरोध करने वालों का कहना है कि इसका पूरा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। इससे किसान और उसकी उपज पर प्राइवेट कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और सारा फायदा बड़ी कंपनियों को मिलेगा। कृषि उत्पाद मार्केट कानून के तहत किसानों को फ्री व्यापार की सुविधा मिलती है। इससे मंडियां खत्म हो जायेगी। अध्यादेश से मंडी एक्ट केवल मंडी तक ही सीमित कर दिया गया है और मंडी में खरीद-फरोख्त पर शुल्क लगेगा जबकि बाहर बेचने-खरीदने पर इससे छूट मिलेगी। इसके अलावा बड़ी कंपनियां की मनमानी बढ़ेगी और छोटे व्यापारी संकट में आ जायेंगे। कंपनियां किसानों की जमीन पर नियंत्रण करने लगेंगी।
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सरकार कह रही कि उसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना
सरकार शुरू से ही कह रही है कि उसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुना करना है। सरकार का कहना है कि ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर देगा। कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नये अवसर मिलेंगे, जिनसे उनका मुनाफा बढ़ेगा। किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा और वे मजबूत होंगे।
-क्या बोले किसान-
फोटो- 27
-इस बिल से किसानों को सीधा-सीधा नुकसान है। सरकार की ओर से मंडी को खत्म किया जा रहा है। ऐसे में किसान को अपनेे फसल को कैस न्यूनतम मूल्य मिल सकेगा। इस कानून में यह साफ नहीं किया गया है कि मंडी के बाहर किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा या नहीं। ऐसे में हो सकता है कि किसी फसल का ज्यादा उत्पादन होने पर व्यापारी किसानों को कम कीमत पर फसल बेचने पर मजबूर करें।
-सौदान सिंह
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फोटो- 28
-सरकार को अगर कोई किसान के हित में बिल लाना था तो वह किसानों की राय भी ले सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि सरकार फसल के भंडारण का अनुमति दे रही है, लेकिन किसानों के पास इतने संसाधन नहीं होते हैं कि वो सब्जियों या फलों का भंडारण कर सकें। ऐसे में वो व्यापारियों को कम कीमत पर अपनी फसल बेचेंगे। व्यापारी अपने पास उनकी फसल जमा कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास भंडारण की सुविधा अच्छी होती है। बाद में वह अपने हिसाब से बाजार में फसल को बेचेंगे। ऐसे में फसल की कीमत तय करने का अधिकार बड़े व्यापारियों या कंपनियों के पास आ जाएगा
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-कृष्णपाल सिंह राठौर
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