बदायूं/उझानी। उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने से जल प्रलय के मद्देनजर जिले में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। गंगा समेत अधिकतर नदियों में पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए सोमवार को बाढ़ खंड विभाग ने गंगा किनारे के इलाकों में पहुंचकर हालातों पर गौर किया। विभाग के अनुसार उत्तराखंड के रास्ते खासकर गंगा में पहुंचने वाले पानी से बाढ़ जैसे हालत पैदा हो सकते है। इसलिए सहसवान, उझानी, कादरचौक और उसहैत क्षेत्र को अलर्ट पर रखा गया है।
बाढ़ खंड विभाग की ओर से सोमवार को फिर से हालात की समीक्षा की गई। अफसर इसे लेकर उत्तराखंड के अफसरों से भी संपर्क बनाए हुए हैं। नरौरा डैम से भी हालात के बारे में पूरे दिन जानकारी की जाती रही। उत्तराखंड में खासकर चमोली जिले और उसके आसपास इलाके की हालात के मद्देनजर रविवार शाम को ही जिला प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी कर दिया गया था। इसके बाद सहसवान, उझानी में खासकर कछला केेे आसपास के इलाके, कादरचौक और उसहैत के क्षेत्रों में मुनादी भी कराई गई। गंगा किनारे इलाके के लोगों से कहा गया है कि वे सतर्क रहें। अफसरों को गंगा में पानी बढ़ने पर बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की शंका बढ़ी लेकिन, सोमवार सुबह में यह काफी कम हो गई। बाढ़ खंड के अफसरों की मानें तो गंगा के रास्ते बदायूं जिले में पानी पहुंचने में दो दिन लग सकते हैं। फिर भी जिले में कहीं पर भी बाढ़ नहीं आएगी।
कछला में सामान्य दिखा गंगाघाट
उझानी। उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के बाद लोगों को जब ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट तबाह हो जाने की भनक लगी तो रविवार शाम को कछला गंगाघाट के दुकानदारों में चहलकदमी दिखी। कुछ दुकानदारों ने प्रसाद आदि समेटकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा भी दिया लेकिन, सुबह में जब उन्हें यह पता लगा कि गंगा में पानी पहुंचने की संभावना कम है तो सोमवार को रोज की तरह हालात नजर आए। चूंकि सोमवार को एकादशी थी, सो इलाके के सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी भी लगाई।
नरौरा बांध से डिस्चार्ज को लेकर बाढ़ खंड बुलंदशहर जिले के अफसरों से बात हुई है। सोमवार को पानी नहीं छोड़ा गया है। फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है कि नरौरा बांध से पानी छोड़ा जाएगा। अगर पानी बढ़ता है तो उसे वहां से नहरों में भी छोड़ा जा सकता है। फिर भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। - उमेश चंद्र, एक्सईएन, बाढ़ खंड