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दातागंज के बराही में बीता था पूर्व सांसद राजवीर सिंह का बचपन, शोक की लहर

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तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के साथ राजवीर सिंह। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। बरेली की आंवला लोकसभा से तीन बार सांसद रहे राजवीर सिंह का बदायूं जिले से गहरा नाता रहा। राजवीर सिंह का बचपन दातागंज तहसील के गांव बराही में बीता। प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं हुई। उनके परिवार के काफी लोग अब भी गांव में रहते हैं। जिले के कई नेताओं से राजवीर सिंह की करीबी रही। बुधवार को उनके निधन की खबर जब यहां पहुंची तो शोक की लहर दौड़ गई। शहर की कृष्णा पार्क कॉलोनी में घर बनाकर भी कुछ साल वह रहे, हालांकि बाद में अस्वस्थता की वजह से बरेली शिफ्ट हो गए और घर बेच दिया।
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बदायूं की दातागंज और उसहैत (अब शेखूपुर) विधानसभा सीट आंवला लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। राजवीर सिंह 1989, 1991 और 1998 में आंवला लोकसभा से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। अयोध्या आंदोलन के दौरान भी वह काफी सक्रिय रहे। जिले के बुजुर्ग भाजपा नेताओं को उनके साथ बिताए संस्मरण अब भी याद हैं। गांव और परिवार के लोगों ने उनसे जुड़ी कई यादों के बारे में बताया। पूर्व राज्यमंत्री भगवान सिंह शाक्य, पूर्व विधायक प्रेम स्वरूप पाठक और पूर्व विधायक अवनीश कुमार सिंह से राजवीर सिंह के नजदीकी रिश्ते रहे। 1984 में राजवीर सिंह ने आंवला और भगवान सिंह शाक्य ने बदायूं लोकसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों लोग चुनाव में हार गए। दोनों के बीच काफी घनिष्ठता थी। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेमस्वरूप पाठक से भी राजवीर सिंह की नजदीकी रही। वयोवृद्ध नेताओं ने राजवीर सिंह के साथ बिताए समय को याद करते हुए उनको श्रद्धांजलि दी।
साथ-साथ लड़े थे लोकसभा का पहला चुनाव
- इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या के बाद भाजपा से पहला लोकसभा चुनाव राजवीर सिंह ने आंवला लोकसभा से और मैंने बदायूं लोकसभा से लड़ा था। बाद में वह आंवला लोकसभा से तीन बार सांसद चुनेे गए। मैं उसहैत विधानसभा से कई बार विधायक रहा। राजवीर सिंह का अक्सर मेरे आवास पर आना-जाना होता था। 1975 में इमरजेंसी के समय से हम दोनों की घनिष्ठता बढ़ी। उनके कार्यकाल में उसहैत विधानसभा में काफी विकास कार्य हुए। हम दोनों का लंबा समय साथ बीता। उनका इस तरह से चला जाना बेहद दुखद है। - भगवान सिंह शाक्य, पूर्व राज्यमंत्री
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सरल स्वभाव और प्रखर वक्ता थे राजवीर सिंह
- राजवीर सिंह बेहद सरल स्वभाव के होने के साथ प्रखर वक्ता भी थे। उनका राजनीतिक जीवन भाजपा से ही शुरू हुआ। अयोध्या आंदोलन के दौरान भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से भी उनकी नजदीकियां थीं। बदायूं के दातागंज और उसहैत विधानसभा क्षेत्र भी आते थे। अक्सर राजवीर सिंह का बदायूं आना-जाना रहता था। उनसे मेरी काफी नजदीकी रही। उनके निधन के बारे में जब सूचना मिली तो काफी पीड़ा हुई। - प्रेम स्वरूप पाठक, पूर्व विधायक
कभी ऐसा लगता ही नहीं था कि वह सांसद हैं
- राजवीर सिंह का अक्सर गांव में आना-जाना रहता था। चुनाव कैंपेन के दौरान कई बार वह यहां विश्राम भी किया करते थे। उनके स्वभाव से कभी ऐसा लगता ही नहीं था कि वह सांसद हैं। उन्होंने लंबा राजनीतिक जीवन भाजपा में बिताया। 2014 में बदायूं के कृष्णा पार्क में आवास बनाकर यहां रहने लगे थे, लेकिन बाद में यहां से बरेली चले गए। करीब सात साल पहले वह गांव आए थे। उसके बाद उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा। उनके निधन से गांव में शोक की लहर है। उनके कार्यकाल में बराही गांव में काफी विकास हुआ। -नवल सिंह, राजवीर सिंह के पारिवारिक भतीजे
चीजों की याद रखने की क्षमता से हैरान होते थे लोग
राजवीर सिंह की चीजों और लोगों के नाम याद रखने की क्षमता बेहद ज्यादा थी। जिससे वह एक बार मिल लेते थे उसका चेहरा और नाम नहीं भूलते थे। वर्षों के बाद भी अगर वह व्यक्ति उनको मिलता था तो नाम से ही बुलाते थे। जब भी गांव आते थे अपने से छोटों का नाम लेते थे। उनका जिस तरह का व्यवहार था उसको देखकर कभी लगता ही नहीं था कि वह सांसद हैं। काफी समय से वह अस्वस्थ चल रहे थे। जब तक बदायूं के कृष्णा पार्क में रहे गांव के लोग उनका हाल जानने भी जाया करते थे। - रोहिताश सिंह, राजवीर सिंह के पारिवारिक भतीजे
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