चूंकि सिलिंडर से गैस के प्रेशर के साथ आग की बहुत ऊंची लपटें निकल रही थीं, लिहाजा वह चाहकर भी बेटों के साथ बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। घरवाले जब तक ऊपर पहुंचे, तब तक आग पूरे कमरे में फैल चुकी थी। उन्होंने बमुश्किल आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सुखपाल और उनके दोनों बेटों की मौत हो चुकी थी। हालांकि मोहल्ले में यह भी चर्चा है कि सुखपाल और उनकी पत्नी के बीच मनमुटाव चल रहा था।
लोग इस हादसे पर संदेह जता रहे हैं। उनका सवाल है कि जब त्रिवेणी ढाई माह के बच्चे को लेकर कमरे से निकल गईं तो फिर सुखपाल दोनों बेटों को लेकर कमरे से क्यों नहीं निकल पाए। कमरे में बर्तन तो इधर-उधर फैले मिले लेकिन खाना बनाया जा रहा था, इसकी अब तक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि आग लगने के कारणों की बारीकी से छानबीन की जा रही है।