बदायूं। उप निदेशक कृषि कार्यालय के सभागार में मंगलवार को किसान दिवस का आयोजन महज खानापूरी साबित हुआ। प्रचार-प्रसार के अभाव में किसानों की संख्या बेहद कम रही। वहीं कई विभागों के सक्षम अधिकारी भी मौजूद नहीं दिखे। सक्षम अधिकारी के न रहने की वजह से किसानों की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार नहीं हुआ। न ही मौके पर कोई समस्या निस्तारित हुई।
अब तक किसान दिवस डीएम और सीडीओ की अध्यक्षता में होते रहे हैं। बुधवार को किसान दिवस उप कृषि निदेशक मनोज कुमार की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने समस्त कृषकों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए फार्मर रजिस्ट्री कार्यक्रम की जानकारी दी। अपील की कि सभी किसान अपनी फार्मर रजिस्ट्री अवश्य करा लें। उन्होंने बताया कि रबी सीजन के लिए सरसों, मटर, मसूर, चना और गेहूं का बीज लेने के लिए किसान नजदीकी जनसेवा केंद्र या agridarshan.up.gov.in पर बुकिंग करा सकते हैं।
चयन होने के बाद ही राजकीय कृषि बीज भंडार से बीज मिल सकेगा। इसके बाद जिला उद्यान अधिकारी आरएन वर्मा ने किसानों को आलू बीज की प्रजातियों और अनुदान योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसान दिवस में मौजूद कुछ किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। ग्राम करौलिया निवासी नरवेश सिंह ने रेहड़िया और सैदपुर समिति पर डीएपी की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाया, जिस पर एआर कोऑपरेटिव विवेक कौशल ने जवाब दिया।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने आलू पर अनुदान की जानकारी मांगी। धीराबारी मजरा कमां के हाकिम सिंह ने केसीसी की लिमिट बढ़वाने की मांग रखी, जिस पर अग्रणी जिला बैंक पीएनबी के प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया। उसावां के रामबाबू यादव के सवाल पर खाद्य विपणन विभाग ने बताया कि जनपद में धान के 46 और बाजरा के 16 क्रय केंद्र खोले गए हैं।
अंत में उप कृषि निदेशक ने शिकायतों के त्वरित निस्तारण की बात कहकर किसान दिवस के समापन की घोषणा कर दी। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी मनोज रावत, अधिशासी अभियंता नागेंद्र सिंह सहित अन्य विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।