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किसान दिवस: न अधिकारी पहुंचे और न ही अन्नदाता

Wed, 16 Mar 2016 09:19 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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महीने के तीसरे बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस में न तो जिले के अधिकारी पहुंचे और न ही अन्नदाता। महज दो किसान अपनी शिकायत करने के लिए पहुंचे। किसान दिवस का दम समाजवादी विकास दिवस के तले घुटकर खत्म हो गया, जो दो किसान पहुंचे भी, वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने उनके शिकायती पत्र लेकर रखकर लिए और सिर्फ अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन देकर विदा कर दिया। 
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बुधवार दोपहर सवा 12 बजे विकास भवन में आयोजित किसान दिवस में जिले के  अधिकारी नहीं पहुंचे। वहां पर कृषि विभाग और विकास भवन के कुछ कर्मचारी मौजूद थे, ऐसे में जो किसान आए वहां पर अधिकारियों की सीट खाली पाकर वापस लौट गए। किसान दिवस पूरी तरह से फ्लॉप रहा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अधिकांश जिलास्तरीय अधिकारी समाजवादी विकास दिवस की व्यवस्थाएं बेहतर कराने में लगे रहे। वहीं जिन किसानों को शिकायत भी करनी थी, उन्होंने ब्लाक स्तर पर अधिकारियों के मिलने पर अपनी शिकायत की, जहां पर उन्हें निस्तारण का आश्वासन भी मिला। 
डीएम सहित अधिकांश जिलास्तरीय अधिकारी ब्लाकों में आयोजित समाजवादी किसान दिवस में लगे रहे। किसान दिवस में विषय वस्तु विशेषज्ञ थान सिंह और अन्य स्टाफ मौजूद रहा। किसानों की समस्याओं के निस्तारण को उनके शिकायती पत्र ले लिए गए, जिनका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा। ब्लाक स्तर पर ही अधिकांश किसानों ने अपनी समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया।
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...खाली हाथ कहीं
नहीं होती सुनवाई
किसान ने ये शब्द बोलकर पूरी व्यवस्था पर किया कटाक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों के हित में तमाम योजनाएं चलाए जाने के बावजूद उन्हें कितना लाभ मिल रहा है और सरकारी तंत्र द्वारा किसानों को कितना शोषण किया जा रहा है। इसे किसान दिवस में पहुंचे उसावां ब्लाक के गांव खेरा जलालपुर पुख्ता के किसान जय सिंह ने महज तीन शब्द बोलकर प्रशासनिक व्यवस्था पर करारा कटाक्ष किया।
विकास भवन सभागार में जय सिंह ने बताया कि उस पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की इंद्रा चौक स्थित बैंक शाखा ने फर्जी रूप से साढ़े नौ लाख रुपये का लोन दिखा दिया, जबकि उन्होंने अभी तक लोन लिया ही नहीं। कहा कि इसकी शिकायत वह तीन साल से कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। किसान से सुनवाई न होने की वजह जाननी चाही, तो बहुत बेबाकी के साथ कहा कि ‘छूंछा किसने पूछा’ (खाली  हाथ जाओ तो कहीं सुनवाई नहीं होती है।)। बोले, यदि वह भी महात्मा गांधी  छाप नोटों को लेकर हाकिमों के पास जाएं, तो उनकी सुनवाई भी हो जाएगी।
किसान जय सिंह ने बेबाकी के साथ ये शब्द बोलकर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और उनके  द्वारा किसान हित में किए जा रहे कार्यों का सच उजागर कर दिया। साथ ही वहां पर मौजूद प्रशासनिक कर्मचारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आमजन और किसानों को सरकारी तंत्र कितना फायदा पहुंचा पा रहा है। वृद्ध  किसान ने बताया कि उनका 72 बीघा के चक पर साढ़े नौ लाख रुपये का लोन वर्ष  2013 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा फर्जी रूप से दिया गया था। कहा कि उस मामले में सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इस मामले की शिकायत तहसील दिवस, जिलास्तरीय अधिकारी और किसान दिवसों में करने के बाद ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उस बैंक में उनका ही नहीं, बल्कि 31 अन्य लोगों पर फर्जी लोन कर दिया है।
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इस मामले  में एफआईआर दर्ज होने के बाद कार्रवाई की जा रही है। यह मामला अदालत में भी  चल रहा है। अदालत का फैसला होने के बाद ही इस मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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-मुकेश सक्सेना, वरिष्ठ शाखा प्रबंधक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंद्रा चौक शाखा
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