अल्लाह ने कहा कि जो चीज तुमको सबसे अधिक प्रिय हो उसको मेरी राह में कुर्बान करो। पैगंबर इब्राहीम को उनके पुत्र इस्माईल सबसे अधिक प्रिय थे। इब्राहीम ने अपने बेटे को ख्वाब का माजरा बताया और उनको कुर्बान करने के लिए ले गए। जब इब्राहीम अपने बेटे को कुर्बान करने लगे तो जिब्राइल फरिश्ते ने जन्नत से एक दुम्बा उनके बेटे स्थान पर लाकर रख दिया।
जब उन्होंने अपनी आंखों की पट्टी खोली तो देखा उनके बेटे के स्थान पर एक दुम्बा पाया जबकि पैगंबर इब्राहीम बेटे को समझ कर कुर्बानी कर रहे थे। अल्लाह ताला की तरफ से पैगंबर इब्राहीम को विशारत हुई कि हमने अपनी बारगाह में आपकी कुर्बानी क़ुबूल फरमाई। तभी से कुर्बानी की शुरुआत हुई। प्रति वर्ष मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद उल अजहा पर कुर्बानी पेश की जाती है।