बदायूं। कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों के बाद अब कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों को भी एक सितंबर से खोलने का निर्णय लिया गया है। इसमें परिषदीय के साथ-साथ माध्यमिक और कान्वेंट के सभी स्कूल शामिल होंगे। हालांकि अब तक स्कूल खोलने के लिए यहां कोई आदेश नहीं आया है पर सरकार की मंशा मीडिया के जरिये सार्वजनिक होने के बाद अभिभावकों के माथे पर बल जरूर पड़ गए हैं। छोटे बच्चे किस तरह स्कूल में सुरक्षित रह पाएंगे, ये खतरा उन्हें सता रहा है। तीसरी लहर का खौफ अलग से है। वहीं स्कूलों के प्रधानाचार्य और शिक्षकों में खुशी है कि सत्र शुरू होने से शिक्षण व्यवस्था पटरी पर आ सकेगी।
प्रदेश सरकार की ओर से 16 अगस्त से कक्षा नौ से 12 तक के सभी बोर्ड के स्कूलों को खोल दिया गया है, हालांकि अभी दो पालियों में पढ़ाई करने के निर्देश हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार जिले में पढ़ाई शुरू भी हो गई हैं। अभी पढ़ाई शुरू हुए एक दिन ही बीता था कि इसी बीच शासन ने एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक के सभी स्कूलों को खोलने के निर्देश भी दे दिए हैं। स्कूलों को खोलने की खबर से शिक्षकों में खुशी देखने को मिल रही है। शिक्षकों का कहना है कि अभी वह लगातार स्कूल आ रहे हैं लेकिन अपने मूल काम को सही से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। अब स्कूलों में छात्र-छात्राओं के आने से शिक्षण का माहौल बनेगा, यह बच्चों के लिए भी अच्छा है। वहीं अभिभावकों के मन में स्कूल खोले जाने की जानकारी से डर सता रहा है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के मामले में शासन ने जल्दबाजी की है। छोटे बच्चों के स्कूल खोलने में कुछ समय और रुकना चाहिए था। कोरोना की तीसरी लहर आई तो छोटे बच्चों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकती है।
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अभी छोटे बच्चों के स्कूलों को खोलने के मामले में सरकार जल्दबाजी कर रही है। इतनी जल्दी स्कूल नहीं खोलना चाहिए। अभी एक-दो माह का समय और लेना चाहिए था।
-रेखा रानी, अभिभावक, तहसील दातागंज
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मौजूदा समय को देखते हुए बड़े बच्चों के स्कूलों को खोलना अच्छा फैसला है लेकिन कोरोना की तीसरी लहर छोटे बच्चों के लिए दिक्कत कर सकती हैं, ऐसे में अभी सरकार को इंतजार कर लेना चाहिए था।
-रश्मि गुप्ता, अभिभावक
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फिलहाल कोरोना का खतरा उतना नहीं है लेकिन तीसरी लहर की संभावना भी सरकार ही जता रही है। ऐसे में छोटे बच्चों के स्कूलों को खोलने से संक्रमण की गुंजाइश बढ़ सकती है। इतने छोटे बच्चे दूरी व अन्य नियमों का पालन भी करना नहीं जानते।
-दीपा सिंह तोमर, अभिभावक
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शासन की ओर से स्कूलों को तो पहले ही खोल दिया गया था। वहां शिक्षक लगातार आ रहे थे, लेकिन वह अपना फर्ज ठीक से नहीं निभा पा रहे थे, पर अब बच्चों के आने से वह सही से पढ़ा पाएंगे।
-अमित वर्मा, शिक्षक, अल्हापुर
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अब छात्र-छात्राओं के लिए भी स्कूल को खोले जाने की तैयारी है। इससे स्कूल में रौनक बढ़ जाएगी। स्कूल में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने में अच्छा लगेगा। ऐसे में स्कूल आने से हम लोगों का मन भी लगा रहेगा।
-मोहम्मद असलम, शिक्षक, अल्हापुर
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छात्र-छात्राओं के बिना स्कूल सुनसान था। अब स्कूलों की रौनक वापस आ जाएगी। शिक्षक भी मन लगाकर अब बच्चों को पढ़ा सकेंगे। शासन की ओर से जो निर्णय लिया है, वह बेहतर है। खतरा बढ़ेगा तो सरकार के पास दोबारा छुट्टी का विकल्प है।
-राजेश कुमार, शिक्षक, सहसवान