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डीएम का चिकित्सा सुविधाओं पर फोकस

Tue, 12 Apr 2016 11:50 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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‌बैठक - फोटो : अमर उजाला
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प्रमुख चिकित्साधिकारियों को तलब कर डीएम ने ली क्लास
 पुरुष एवं महिला चिकित्सालय में साफ सफाई, ओपीडी के निर्धारित समय में चिकित्सकों की अनिवार्य रूप से उपस्थिति और किसी बड़ी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही रेप के मामलों में चिकित्सीय जांच के लिए अनावश्यक टालमटोल न करने सहित चिकित्सीय सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए डीएम ने सीडीओ डॉ. सुनील कुमार और जिला महिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. एके गुप्ता एवं डॉ. रेखा रानी को तलब कर दिशा निर्देश दिए। कहा कि किसी प्रकार की लापरवाही और शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
मंगलवार को डीएम सीपी त्रिपाठी ने एसएसपी सौमित्र यादव के साथ चिकित्सीय सुविधाओं में और सुधार लाने के लिए जिला एवं पीएचसी, सीएचसी पर तैनात सभी चिकित्सकों की जिले में तैनाती की तारीख मोबाइल नंबर और उनके कार्यों के संबंध में चिकित्सा अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। डीएम ने कहा है कि दायित्वों का निर्वहन न करने वालों के विरूद्ध अवश्य कार्रवाई की जाएगी। सांसद धर्मेंद्र यादव के सहयोग से रिक्त पदों पर चिकित्सकों की तैनाती कराई जाएगी। इस अवसर पर एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेंद्र कुमार यादव, एडीएम प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव और नगर मजिस्ट्रेट अजय कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। 
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एसएसपी ने रेप और डाक्टरी मुआयना पर खड़े किए सवाल
बदायूं। एसएसपी सौमित्र यादव ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि रेप के मामलों में चिकित्सीय जांच के लिए अनावश्यक रूप से टालमटोल की जाती है। जिसपर डीएम ने चिकित्सा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा तो तीनों अधिकारी कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक दिवस की ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि यदि कोई चिकित्सक अवकाश पर हो तो भी जिला स्तर पर मेडिकल कराने में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। 
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बड़ी घटना या हादसों में घायलों को त्वरित मिले चिकित्सा
बदायूं। डीएम, एसएसपी ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि जिले में जब कोई बड़ी दुर्घटना होती है और घायलों को जिला चिकित्सालय लाया जाता है तो सभी घायलों को एक साथ चिकित्सा सुविधा न मिल पाने के कारण आपाधापी और चीख चिल्लाहट के माहौल मेे ऐसा प्रतीत होता है कि चिकित्सालय में तमाम अव्यवस्थाएं हावी हैं। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि जब कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो तो सभी घायलों को अलग-अलग चिकित्सकों द्वारा एक साथ बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
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