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पायरेथ्रम दवा के छिड़काव को नहीं मिल रहा मिट्टी का तेल

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बदायूं। जिले में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए बजट तो पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन जहां पर खर्च होना है वहां पर धन खर्च नहीं किया जा रहा है। इससे इस साल भी जिले में मलेरिया और डेंगू का प्रकोप बना हुआ है। मलेरिया के अब तक 12 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं तो वहीं डेंगू रोगियों की संख्या भी 50 के पार हो गई है। इसका एक कारण यह भी है कि डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मादा मच्छर एडिज एजिप्टी का नाश नहीं हो पा रहा।
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डेंगू फैलाने वाले संक्रमित मादा एडिज एजिप्टी मच्छर के नाश के लिए पायरेथ्रम का छिड़काव किया जाता है। यह काफी महंगी मच्छरनाशक दवा है। पायरेथ्रम का छिड़काव मिट्टी के तेल के साथ किया जाता है। एक लीटर पायरेथ्रम के छिड़काव के लिए 19 लीटर मिट्टी के तेल की जरूरत होती है। गौर करने वाली बात यह है कि मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से हाईरिस्क बदायूं के लिए शासन ने 100 लीटर पायरेथ्रम तो उपलब्ध करा दी, लेकिन इसके अनुपात से अब तक बदायूं को मिट्टी का तेल नहीं मिल सका है। इतना ही नहीं 100 लीटर पायरेथ्रम उपलब्ध कराने के साथ इसकी खरीद के लिए तीन लाख का अतिरिक्त बजट भी दे दिया गया। मिट्टी के तेल की किल्लत के चलते पायरेथ्रम का जिले में छिड़काव ही नहीं हो पा रहा। ऐसे में सीजन खत्म होने के बाद भी जिले में मलेरिया और डेंगू का प्रकोप अब भी बना हुआ है। शासन के साथ जिला स्तर की इस लापरवाही से लाखों रुपये कीमत की दवा मियाद निकलने के बाद खराब हो जाएगी। वहीं दूसरी ओर जिले से मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप भी खत्म नहीं होगा।
एक लीटर पायरेथ्रेम, 19 लीटर मिट्टी के तेल से 100 घरों में छिड़काव
मच्छरनाशक पायरेथ्रम काफी महंगी दवा है। एक लीटर पायरेथ्रम में 19 लीटर मिट्टी का तेल मिलाया जाता है। इसके बाद इस दवा से करीब 100 घरों में छिड़काव किया जाता है। नियम यह भी है कि अगर किसी घर में कोई डेंगू का रोगी मिलता है तो उसके आसपास 100 मीटर तक के घरों में पायरेथ्रम का छिड़काव किया जाना चाहिए। जिले में सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक 50 से ज्यादा डेंगू और 12 हजार से ज्यादा मलेरिया के मरीज मिल चुके हैं। इसके अनुपात के हिसाब से अब तक पायरेथ्रम का छिड़काव ही नहीं किया जा सका है। ऐसे में स्थिति लगातार विस्फोटक बनी हुई है।
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जरूरत से ज्यादा दे दिया डीडीटी पाउडर
साल 2018 और 2019 में जिले में मलेरिया का भयंकर प्रकोप रहा। 2019 में बदायूं को मलेरिया और मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से प्रदेश में दूसरे नंबर पर रखा गया था। चार ब्लॉक के सौ से ज्यादा गांवों को हाईरिस्क श्रेणी में शामिल किया गया। साल 2020 में स्थिति पर काबू के लिए जिले को जरूरत से कहीं ज्यादा 40 एमटी डीडीटी पाउडर दिया गया है। जबकि पिछले दो साल से जिले की जरूरत पूरी नहीं की जा रही थी। पिछले साल जहां सिर्फ 10 लाख रुपये दिए गए थे वहीं इस साल सर्वे और दवाओं के छिड़काव के लिए 34 लाख रुपये दिए गए। समय और सही स्थान पर बजट और दवाओं का किस तरह से इस्तेमाल किया जाए इसके लिए शासन स्तर से कोई ठोस गाइड लाइन जारी नहीं की गई। ऐसे में इस साल भी जिले में मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है।
एक लीटर पायरेथ्रम के छिड़काव के लिए 19 लीटर मिट्टी के तेल की जरूरत होती है। जिले को करीब 100 लीटर पायरेथ्रम मिला है। तीन लाख का बजट पायरेथ्रम खरीद के लिए भी मिला है। यह खरीद यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के जरिए होनी है। पायरेथ्रम के छिड़काव के अनुपात में मिट्टी का तेल नहीं मिल सका है। इसके लिए उच्च अधिकारी लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। मिट्टी का तेल आवंटित होते ही व्यापक स्तर पर छिड़काव शुरू कराया जाएगा। - डॉ. हरिदत्त कुमार, एसीएमओ/डीएमओ
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