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घटना की रात राक्षस बन गया था हत्यारा, किसी को नहीं बख्शा

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नत्थूलाल फाइल फोटो। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। 21 सितंबर 2020 की रात हत्यारा रूपकिशोर राक्षस बन गया था। जो सामने आया उस पर हमला किया। बुजुर्ग किसान नत्थूलाल पर फावड़े से न सिर्फ अनगिनत वार किए बल्कि उनका सिर धड़ से अलग कर उसे दफन कर दिया था।
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वृद्ध किसान के परिजन ने बताया कि रूपकिशोर मूल रूप से बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव बमेड़ का रहने वाला है। जबकि बुजुर्ग किसान नत्थूलाल दीननगर शेखपुर गांव के रहने वाले थे। दोनों के खेत बराबर में थे। इससे खेत पर आने-जाने के दौरान कभी-कभी उनकी नत्थूलाल से मुलाकात हो जाया करती थी। बताया जाता है कि घटना वाली रात रूपकिशोर राक्षस बन गया था। उसके सामने जो भी आ रहा था वह उस पर हमला कर रहा था। उसने नत्थूलाल की हत्या के प्रत्यक्षदर्शी नंदराम पर ही हमला किया था। जिससे वह डरकर भाग खड़ा हुआ। सूचना पर नत्थूलाल के परिवार वाले पहुंचे तो उसने उन पर भी हमला कर दिया। हालांकि उन्होंने रूपकिशोर को पकड़ लिया था और रस्सी से बांधकर डाल दिया था। सुबह पुलिस पहुंची तो वह उसके कब्जे में भी बमुश्किल आया। उसने थाने के एक सिपाही के हाथ का हिस्सा चबा लिया। पुलिस के चंगुल से भागने की कोशिश की। जैसे-तैसे उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था।
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एक पत्नी की हत्या की, दूसरी छोड़कर चली गई
रूपकिशोर ने दो शादियां की थीं। उसकी पहली पत्नी दूसरे प्रांत की थी। उसकी उसने जलाकर हत्या कर दी थी। शिकायत न होने से कार्रवाई नहीं हुई थी। दूसरी पत्नी उसके गुस्सैल रवैये को देखकर छोड़कर मायके चली गई तो उसने तीसरी शादी कर ली।
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नहीं दिखा मौत का खौफ
स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट महेंद्र सिंह तृतीय की अदालत में बुधवार को फांसी की सजा सुनाए जाने के दौरान हत्यारोपी रूपकिशोर के चेहरे पर कोई शिकन नहीं था और न ही हत्या करने का पछतावा दिख रहा था। वह चुपचाप खड़ा सजा सुनता रहा। जब कोर्ट मोहरिर्र सरवीर सिंह ने आदेश पर अंगूठा लगवाया, तब भी उसके चेहरे का भाव नहीं बदला।
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अपने परिवार से अलग रहते थे नत्थूलाल
नत्थूलाल के चार बेटे हैं। इसके बावजूद वह अपने बेटों से अलग रहते थे। उनके साथ केवल उनकी पत्नी कोकला देवी रहती थीं। वह खेतीबाड़ी भी स्वयं करते थे। हालांकि उनके बेटे इस दौरान हाथ बंटा देते थे।
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बेटा बोला- हत्यारे को अदालत ने फांसी की सजा दी, सुकून मिला
नत्थूलाल के बेटे ओमपाल ने बताया कि जिस तरह हत्यारोपी ने उनके पिता की हत्या की। उसके अनुसार उसे फांसी की ही सजा सुनाई जानी चाहिए थी। न्यायालय ने बिल्कुल सही फैसला सुनाया है। हालांकि उसके पिता वापस नहीं आ सकते लेकिन हत्यारोपी को सजा से उसे सुकून जरूर मिला है।
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कोर्ट ने की टिप्पणी
पाइप देने से मना करने की मात्र छोटी सी बात पर बुजुर्ग को जातिसूचक गालियां देते हुए बलपूर्वक व निर्दयतापूर्वक फावड़े से चार बार वार कर क्रूरता पूर्वक सिर धड़ से अलग कर दिया गया। फावड़े से इतने वार किए गए कि उनका मस्तिष्क, आंख, कान और शरीर के कई भाग बाहर आ गए। सिर को काटकर जमीन में गाढ़ दिया गया। शेष शरीर को साक्ष्य छिपाने के आशय से छुपाया। एक वृद्ध व्यक्ति के साथ नवयुवक हत्यारे ने कोई दया नहीं दिखाई। ये अपराध क्रूरता, जघन्यता व अपराध की विरलतम की श्रेणी में आता है।
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- महेंद्र सिंह तृतीय, स्पेशल जज एससी एसटी कोर्ट

न्यायालय परिसर में सजा सुनाये जाने के दौरान पहुंचे नत्थूलाल के परिवार वाले। संवाद- फोटो : BADAUN

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