सूरत-ए-हाल : शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र
40 गांवों में आज तक नहीं हुआ विद्युतीकरण, थ्री फेज बिजली के भी लाले
उसहैत काटकर बना यह क्षेत्र मुस्लिम, यादव और मौर्य बहुल
2012 में सपा के आशीष यादव चुने गए थे पहले विधायक
आज के दौर में कल्पना करना थोड़ा मुश्किल लगता है लेकिन यह सच है कि शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 40 गांवों में आज भी बिजली नहीं है। नौ साल पहले वजूद में आए शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र का निर्माण उसहैत को काटकर किया गया था। इस क्षेत्र में जातिवाद का करंट दौड़ता है। मुस्लिम, यादव, मौर्य-कुशवाहा के साथ जाटव, कश्यप, लोधी मतदाता हार-जीत के समीकरण बनाते हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के आशीष यादव इस विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक चुने गए थे।
वर्ष 2012 के चुनाव में सपा उम्मीदवार आशीष यादव को 68533 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार भगवान सिंह शाक्य को 8252 वोटों से पराजित किया था। शाक्य को 60281 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर बसपा के मोहम्मद काजी रिजवान को 51979 वोट मिले थे। चौथे स्थान पर रहे पूर्व विधायक मुस्लिम खां को 11150 वोट मिल पाए थे। बाकी छह प्रत्याशियों को एक से पांच हजार के बीच वोट मिले थे और छह प्रत्याशी तो एक हजार का आंकड़ा भी नहीं छू सके थे।
गंगा के बहाव क्षेत्र वाले इस विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है जो निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इनके साथ यादव, शाक्य-मौर्य और जाटव, कश्यप, लोधी मतदाता भी चुनाव का नतीजा बदलने की क्षमता रखते हैं। यह अलग बात है कि विकास के मामले में यह क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ है।
ये हैं यहां के जातीय समीकरण
वर्ष 2008 में बने शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में 2012 के पहले विधानसभा चुनाव में आशीष यादव को यादव और मुस्लिम मतदाताओं के एकजुट होने का फायदा मिला और उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी भगवान सिंह शाक्य को पराजित कर दिया। हालांकि शाक्य ने अपनी बिरादरी के मतदाताओं के दम पर उन्हें कड़ी टक्कर दी। इस बार भी चुनाव में जातीय समीकरण के आधार पर ही फैसला होने की संभावना है।
मतदाता संख्या
कुल मतदाता 377288
पुरुष 207534
महिला 169744
थर्ड जेंडर 10
विधानसभा चुनाव- 2012
कुल मतदाता 333673
निर्वाचित विधायक आशीष यादव, सपा
वोट मिले 68583
पराजित प्रत्याशी भगवान सिंह शाक्य, कांग्रेस
वोट मिले 60281
जातिगत बहुलता
मुस्लिम, यादव, शाक्य-कुशवाहा, जाटव, कश्यप, लोधी, ठाकुर, वैश्य, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति।
शिक्षा:
यूं तो कहने के लिए दो निजी डिग्री कॉलेज हैं, लेकिन एक भी राजकीय डिग्री कॉलेज नहीं है। एक राजकीय माध्यमिक विद्यालय है, लेकिन राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय नहीं है।
सड़कें-
कादरचौक से लेकर बदायूं, ककराला-गुलडिय़ा मार्ग, सखानूं, जलालपुर, सुर्खा, रेवा, रमनगला, मामूरगंज भोजपुर, मोहम्मद गंज की सड़क टूटी पड़ीं।
बाढ़-
बाढ़ आने पर तराई क्षेत्र के करीब 45 गांव ज्यादा प्रभावित होते हैं, जबकि तमाम गांवों का संपर्क मार्ग ही टूट जाता है। क्षेत्र का अधिकांश भाग गंगा नदी के बहाव क्षेत्र में आने से प्रभावित होता है।
क्या हैं चुनावी मुद्दे
बिजली-
बड़ी समस्या 40 गांवों में विद्युतीकरण न होने की है लेकिन इसके साथ बिजली का शेड्यूल सही न होने की वजह से क्षेत्र के और तमाम गांवों को भी तीन दिन टू-फेस और तीन दिन थ्री-फेस बिजली की सप्लाई की जाती है। इसका सीधा असर बिजली से चलने वाले छोटे-मोटे धंधों पर पड़ता है।
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शिक्षा-
कोई राजकीय या अनुदानित डिग्री कॉलेज नहीं है। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज भी नहीं। छात्राओं को पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है। वहीं, छात्रों को बदायूं और बरेली उच्च शिक्षा के लिए दौड़ना पड़ता है।
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उद्योग धंधे-
विधानसभा क्षेत्र में महज एक सहकारी चीनी मिल है जो बदहाल है। इसके अलावा कोई और उद्योग न होने से रोजगार की कमी का संकट रहता है।
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गन्ना किसान-
गन्ना किसानों में बकाया मूल्य न मिलने और अन्य तमाम समस्याएं निस्तारित नहीं होने नाराजगी है। माफियागर्दी के चलते किसानों को औने-पौने दामों में गन्ना बेचना पड़ता है।