बदायूं। रुहेलखंड में मिनी कुंभ कहे जाने वाले ककोड़ा मेले में अब मुख्य स्नान के दिन जैसी भीड़ तो नहीं है, लेकिन अभी हजारों की संख्या में परिवार गंगा तट पर कल्पवास कर रहे हैं। साधु-संतों के आश्रमों में भी भजन कीर्तन चल रहे हैं। इस बीच शनिवार को मेलार्थियों ने प्रतिपदा पर गंगा स्नान किया। रविवार को श्रद्धालुओं का घर वापसी का सिलसिला जारी रहा। मिनी कुंभ में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक रंग भी दिख रहे हैं। कठपुतली के कार्यक्रम हों या फिर वृंदावन की रास लीला और मयूर नृत्य सभी मेलार्थियों का मनमोह रहे हैं।
मेला ककोड़ा में जिला पंचायत की ओर से बनाए गए पंडाल में शनिवार को लखनऊ के नटराज ग्रुप की ओर से कलाकार देवी शंकर ने कठपुतली कार्यक्रम के जरिए पर्यावरण संरक्षण, कोरोना टीकाकरण और खुले में शौच को लेकर जागरूकता भरे संदेश दिए। दहेज प्रथा को लेकर भी जागरूक किया गया। वृंदावन की श्याम-श्यामा गुप के अशोक कुमार शर्मा की टीम की ओर से पेश की गई रासलीला को काफी सराहा गया। कलाकारों ने मयूर नृत्य भी पेश किया। दिनभर पंडाल दर्शकों से भरा रहा। हालांकि, शाम के समय बूंदाबांदी के कारण मेलार्थियों के घर वापस में भी तेजी आई है। मेला में सजाए गए तुलसी मंदिर की रंगोली को भी मेलार्थियों ने काफी सराहा।
शनिवार को प्रतिपदा के दिन सुबह से ही आसमान में बादल और धुंध छाए रहने के कारण मेले में पंडाल बनाकर रह रहे परिवारों के साथ दुकानदारों के माथे पर भी चिंता की लकीरें दिखने लगीं। कुछ लोगों ने सामान समेटना भी शुरू कर दिया। दोपहर के वक्त खेल-तमाशों, झूलों के साथ सर्कस, मीना बाजार, लकड़ी बाजार में भीड़ कुछ बढ़ी, लेकिन शाम को बूंदाबांदी हो गई।
ऊंट की सवारी को लेकर बच्चों में उत्साह
गंगा तट पर ऊंट की सवारी को लेकर बच्चों और युवाओं में उत्साह दिखा। काफी संख्या में लोगों ने ऊंट पर सवार होकर मेला घूमा, गंगा तट पर लोग ऊंट की सवारी करने के लिए ललायीत नजर आए। हालांकि, इस बार मेला में ऊंटों की संख्या काफी कम रही। घोड़े और हाथी इस बार मेला में नहीं पहुंचे। पशु नखासा का आयोजन भी नहीं किया गया। ऐसे में मेलार्थियों को कुछ ऊंट दिखे तो वह इनकी सवारी करने से खुद को रोक नहीं सके।
स्काउट गाइड ने तीन सौ से ज्यादा लोगों को अपनों से मिलाया
मेला ककोड़ा में लगे स्काउट गाइड कैंप का खोया-पाया केंद्र शनिवार को भी काम करता रहा। हालांकि, शुक्रवार को मुकाबले शनिवार को मेला में भीड़ काफी छंट गई है। इसके बाद भी बच्चों के गुम होने का सिलसिला जारी रहा। शुक्रवार को स्काउट गाइड ने मेला में दो सौ से ज्यादा लोगों को मिलाया था। शनिवार को 80 बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिवारों से मिलाया गया। स्काउट गाइड के स्वयं सेवक पूरे मेला में भ्रमण कर गुमशुदा हुए लोगों को तलाश कर खोया-पाया केंद्र तक पहुंचा रहे हैं।
बिगड़े मौसम के कारण तेजी से लौटने लगे श्रद्धालु
मेला ककोड़ा से आम तौर पर कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य गंगा स्नान के बाद अगले दिन प्रतिपदा को मेलार्थी घरों को वापसी नहीं करते। प्रतिपदा के अगले दिन वापसी शुरू होती है, लेकिन शनिवार को प्रतिपदा के दिन अचानक मौसम खराब हो गया। दरअसल, मेला में गंगा तट पर कल्पास करने वाले परिवार हों या फिर दुकानदार सभी पंडाल और टेंट लगाकर रहते हैं। बारिश से बचने के लिए यहां व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा बारिश होने से जमीन दलदली होने का भी खतरा है। ऐसे में शनिवार को मौसम बिगड़ने के कारण काफी संख्या में परिवारों के साथ दुकानदारों ने भी मेला से वापसी शुरू कर दी है। हालांकि, मेला का आयोजन 26 नवंबर तक होना है।