बिल्सी। गांव सिरासौल जसा पट्टी स्थित मां संतोषी देवी के मंदिर में भक्तों ने बजरंगबली की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा धूमधाम से कराई।
इससे पहले पंडित सुरेश चंद्र शर्मा ने यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ कराया, साथ ही अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी कराए। उसके बाद बाबा की प्रतिमा को भक्तों ने गांव का भ्रमण कराया। भ्रमण के बाद मंदिर पहुंचकर प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस मौके पर हेमेंद्र सिंह चौहान, ब्रजमोहन सिंह, मदन मोहन सिंह, अर्जुन सिंह चौहान, धर्मपाल सिंह, अखिलेश कुमार, शिवेंद्र कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
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नौसाना से निकाली गई कलश यात्रा, कई जगह स्वागत
बिनावर। हर वर्ष की तरह इस बार भी क्षेत्र के गांव नौसाना से कलश यात्रा का शुभारंभ बूढ़े बाबा नौसाना धाम महंत अमृतदास के साथ हुआ, जिसमें भक्तगण ट्रैक्टर ट्रॉली, ऑटो और घोड़ा बग्गी पर सवार चल रहे थे।
धूमधाम से निकाली गई कलश यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। कई जगहों पर स्टॉल लगाए गए। यात्रा नौसाना से गांव कुडरा होते हुए विलहत, बिनावर, विजय नगला, रसूलपुर चंदोरा आदि गांवों से होते हुए वापस गांव नौसाना पहुंची। बूढ़े बाबा धाम पर समापन के बाद भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर थाना पुलिस भी तैनात रही। संवाद
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नगला जाटान शिव मंदिर पर हुआ भंडारा
बिल्सी। गांव नगला जाटान स्थित नवनिर्मित शिव मंदिर पर सोमवार की रात हवन-यज्ञ के बाद भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें कई गांवों के लोगों ने पहुंचकर भोलेनाथ का प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर पर सुबह भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की गई। उसके बाद कन्याओं को सहभोज कराकर भंडारा शुरू किया गया, जो रात के 10 बजे तक चलता रहा। सफल बनाने में बृजपाल गिरी, अभिषेक गिरी, चिंटू शर्मा, दिनेश श्रीवास्तव, राजेंद्र सिंह जाखड़, साधू सिंह, चंद्रपाल सिंह, प्रेमसिंह, अजीत सिंह, अमन आदि का विशेष सहयोग रहा। संवाद
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कंस का वध कर मथुरावासियों को अत्याचारों से दिलाई मुक्ति
बिल्सी। गांव बड़नौमी स्थित श्रीराम मंदिर पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सातवें दिन पटियाली से पधारे कथावाचक योगेश मिश्र एवं आरती मिश्र ने कंस वध की लीला वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 11 वर्ष की उम्र में कंस का वध किया।
मथुरा की जनता एवं देवता प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण और बलराम पर फूलों की वर्षा करने लगे। नाना उग्रसेन राजा बने और मथुरा की सभी प्रजा सुखी हो गई। इसके बाद सुदामा चरित्र की कथा ने पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य स्वयं को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करे क्योंकि भक्ति भाव देखकर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वह सब कुछ छोड़कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौडे़ चले आते हैं।
गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है जबकि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है।
मंगलवार को कथा में पहुंचे सहसवान विधायक ब्रजेश यादव का आयोजकों ने स्वागत गया। अंत में आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर उमाशंकर गिरि महाराज, सुखलाल शर्मा, रविकांत शर्मा, राजीव कुमार, नौनीराम, गोपाल गुप्ता, राकेश कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।