गंगा तट से ककोड़ा देवी मंदिर ले जाई जाती झंडी। संवाद
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बदायूं। रुहेलखंड के मिनी कुंभ का शुक्रवार को समापन हो गया। 12 नवंबर को ककोड़ा देवी मंदिर से लाकर गंगा तट पर स्थापित की गई झंडी को को शुक्रवार को विधि विधान के साथ वापस ककोड़ा देवी मंदिर में स्थापित कर दिया गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां ककोड़ा देवी की कृपा से मेला इस बार भव्य रहा। बड़ी दुर्घटना भी नहीं हुई।
सनातन धर्म में ध्वज पताका या झंडा-झंडी यश कीर्ति और पराक्रम का प्रतीक होता है। मान्यता है कि ध्वज पताका से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। रुहेलखंड के मिनी कुंभ के आयोजन से पहले झंडी और गंगा पूजन होता है। झंडी ककोड़ा देवी मंदिर से लाई जाती है है और गंगा तट पर स्थापित की जाती है। मेला समापन के बाद झंडी को वापस मंदिर में स्थापित किया जाता है। अधिकारिक रूप से 15 दिन चलने वाले मेला ककोड़ा का शुक्रवार को झंडी के गंगा तट से ककोड़ा देवी में स्थापित किए जाने के साथ ही समापन हो गया।
टेंट और खेल तमाशे का सामान बचा, गंगा तट पर दूर-दूर तक गंदगी
बदायूं। गंगा तट पर मेला के समापन के बाद दूर-दूर तक पॉलिथीन के साथ ही कचरा बिखरा पड़ा है। मेला स्थल पर अभी टेंट का सामान और खेल तमाशे का सामान बचा है। बिजली व्यवस्था और सुरक्षा की अब कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। पीएसी की फ्लड यूनिट सहित कोतवाली भी मेला स्थल से उखड़ गई है। इसके साथ ही अब मेला स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी अब कासगंज जिला पुलिस-प्रशासन पर आ गई है। दरअसल जिस स्थाल पर मेला का आयोजन होता है वह जिला कासगंज के तहत आता है। बदायूं प्रशासन ने गंगा तट पर फैले कचरा की मेला के बाद निस्तारण करने की कोई व्यवस्था नहीं की है।