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सीएससी संचालक ने हड़पे बिजली बिलों के लाखों रुपये, हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू

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उझानी (बदायूं)। बिजली उपकेंद्र पर संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर बिल जमा करने के नाम पर लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है। मार्च और अप्रैल महीने में हुए गोलमाल के खेल में उपभोक्ताओं के अलावा बिजली विभाग का एक कर्मचारी भी शिकार बन गया। दर्जनों की संख्या में उपभोक्ताओं के बिलों का बकाया तो संचालक ने जमा ही नहीं किया, साथ ही कर्मचारी की आईडी से अन्य उपभोक्ताओें की करीब पौने तीन लाख रुपये की रसीदें जरूर काट दीं। लेकिन यह रकम विभाग के खाते में जमा नहीं की गई। भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार सुबह आरोपी संचालक को हिरासत में ले लिया है।
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बरेली, आंवला की पाल कॉलोनी निवासी सीएससी संचालक को बिजली कर्मचारी की शिकायत के बाद ही हिरासत में लिया गया। इसकी भनक लगते ही बृहस्पतिवार पूर्वाह्न में अहीरावारा गांव से ऐसे लोग भी कोतवाली पहुंच गए, जिनके बिजली बिल के रुपये लेने के बाद भी उन्हें रसीदें मुहैया नहीं कराई गईं हैं। गोलमाल के शिकार उपभोक्ताओं में अहीरवारा गांव के पूर्व सैनिक केशपाल सिंह व उधन सिंह ने बताया कि दोनों ने मार्च में 70 हजार रुपया सीएससी संचालक को दिया लेकिन उसने सॉफ्टवेयर की दिक्कत बताकर अगले सप्ताह रसीदें लेने की बात कहकर टरका दिया था। केशपाल के 20 हजार और उधन सिंह के 50 हजार रुपये थे। केशपाल की मानें तो उसके गांव के अलावा बसोमा, गंगोरा, बुर्रा फरीदपुर समेत कुछेक अन्य गांवों के करीब 35 उपभोक्ताओं के रुपयों में भी गोलमाल किया है।
आरोपी सीएससी संचालक ने बिजली विभाग के एक कर्मचारी के साथ भी खेल कर दिया। सूत्रों के मुताबिक संचालक ने मार्च और अप्रैल में ही कर्मचारी की आईडी का इस्तेमाल किया। मार्च में नौ दिन और अप्रैल में चार दिन के दौरान उसने कर्मचारी की आईडी से तीन लाख 76 हजार रुपये के बिल जमा किए। उपभोक्ताओं को रसीदें भी मुहैया करा दी गईं लेकिन पूरी रकम उसने विभाग के बैंक खाते में जमा नहीं की। इसकी भनक लगने पर कर्मचारी ने दबाव बनाया तो एक लाख रुपये उसे लौटा दिए गए। बिजली कर्मचारी इसकी तहरीर भी कोतवाली में सौंप चुका है। इसी कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी संचालक को उसके आंवला स्थित घर से बृहस्पतिवार सुबह में हिरासत में ले लिया। प्रभारी निरीक्षक विशाल प्रताप सिंह ने बताया कि गोलमाल की शिकायत पर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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बड़े अफसर के कहने पर कर्मचारी ने दिया था आईडी का पासवर्ड
उझानी। सीएससी का संचालक अपनी आईडी से बिजली के बिल जमा करने के लिए अधिकृत होता है। अगर उसकी आईडी में कोई दिक्कत हो तो वह उपभोक्ताओं के बिल जमा नहीं करेगा। बताते हैं कि मार्च में बकाया जमा कराने के लिए विभागीय स्तर से अफसरों पर प्रेशर होता है। उसकी आईडी में टेक्निकल दिक्कत होने पर एक अफसर ने कर्मचारी की आईडी से बिल जमा कराने शुरू करा दिए थे। कर्मचारी को अफसर ने ही आईडी का पासवर्ड संचालक को बता देने को कहा था। अफसर अब दूसरी डिवीजन में तैनात हैं। इसके विपरीत संचालक पर शिकंजा कसे जाने की भनक लगते ही उसके पैरोकार बीच का रास्ता खोजने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
चतुर्थ डिवीजन में मेरी हाल ही में पोस्टिंग हुई है। किसी कर्मचारी और उपभोक्ताओं ने मुझे ऐसा कुछ नहीं बताया है। फिर भी स्थानीय अफसरों और कर्मचारियों से बात कर हकीकत का पता करेंगे। अगर किसी ने गोलमाल किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - राजनाथ यादव, एक्सईएन
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