-बरेली-मथुरा हाईवे पर वितरोई मोड़ के पास हुआ हादसा, दो गंभीर
गन्ना लदी ट्रेक्टर-ट्रॉली सोमवार रात हादसे का शिकार हो गई। ट्रॉली पलटने से उसके ऊपर बैठे ग्रामीणों में युवकों समेत चार लोग दब गए। मदद के लिए ग्रामीणों ने सड़क पर गन्ने डालकर वाहन रुकवाए तब लोगों को बाहर निकाला गया। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में मुन्नालाल कोतवाली क्षेत्र के गांव हुसैनपुर खेड़ा तो दूसरा सहसवान के गांव कौतलनगला का निवासी था। घायलों में दो युवकों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों शव का पोस्टमार्टम कराया है।
हादसा सोमवार रात करीब 11 बजे वितरोई मोड़ के पास हुआ। कोतवाली क्षेत्र के गांव हुसैनपुर खेड़ा और सहसवान के गांव कौतलनगला निवासी ग्रामीणों ने बुवाई के लिए मूसाझाग क्षेत्र के गुलड़िया कसबे से गन्ना खरीदा था। गन्ने को ट्रेक्टर-ट्रॉली पर लादने के बाद पांच-छह लोग गन्ने के ऊपर ही बैठ गए। वितरोई मोड़ के पास की सड़क पर जंगली जानवर को बचाने की कोशिश में चालक हुसैनपुर निवासी भोला नियंत्रण खो बैठा। ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खाई में गिरकर पलट गई। ट्रॉली सवार हुसैनपुर निवासी मुन्नालाल (50), राजपाल (35), कौतलनगला गांव का श्रीकृष्ण (18) पुत्र विजयपाल और उसका पड़ोसी 19 वर्षीय दन्नू गन्नों के नीचे दब गए। जो लोग दबने से बच गए, उन्होंने मदद के लिए वाहनों को रोकने की कोशिश की। जब कोई वाहन नहीं रुका तो उन्होंने सड़क पर गन्ने डाल कर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। बाद में मौके पर रुके वाहन सवार लोगों ने मशक्कत कर दबे लोगों को बाहर निकलवाया। तब तक मुन्नालाल और श्रीकृष्ण की मौत हो चुकी थी। घायलों में दन्नू, राजपाल और ड्राइवर भोला को रात में जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। दन्नू और भोला की हालत गंभीर बताई गई। देर रात ही मृतकों के घरवाले भी अस्पताल पहुंच गए। मुन्नालाल और श्रीकृष्ण का शव देख परिवार वाले बिलखने लगे। कोतवाल गोपीचंद्र यादव ने बताया कि हादसे की सूचना के बाद पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने सड़क पर गन्ना हटवा कर आवागमन शुरू कराया। इधर, मृतक श्रीकृष्ण के भाई नीरज ने बताया कि घायलों को बाहर निकालने में लोगों को काफी वक्त लगा। पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। मामला कोतवाली में इत्तेफाकिया दर्ज किया गया है।
हाईवे पर लगी वाहनों की लंबी कतार
उझानी। चश्मदीद ग्रामीणों में विजयपाल ने बताया कि अंधेरा होने की वजह से आसपास इलाके में कोई भी नजर नहीं आया तो उन्हें मजबूरन सड़क पर डालना पड़ा। उद्देश्य था कि वाहन रुकने पर ही सवारियों से मदद मिल पाएगी। इसके चलते करीब एक घंटा तक बरेली-मथुरा हाईवे पर आवागमन प्रभावित रहा। इस दौरान वाहनों की लंबी कतार भी लग गई।