-अब्दुल्लागंज गांव हुई घटना, चार नामजद
-मृतक उत्तराखंड के हरिद्वार में करता था नौकरी
अब्दुल्लागंज गांव में मामूली कहासुनी ने उस वक्त उग्र रूप ले लिया जब एक पक्ष के चार लोगों ने एक युवक पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और उस पर चाकुओं से भी वार किया। युवक की मौके पर मौत हो गई। मृतक के घरवालों को आता देखकर हमलावर खेतों के रास्ते भाग गए। मृतक उत्तराखंड की एक फैक्ट्री में नौकरी करता था। पुलिस ने हत्या में गांव के ही चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। सीओ प्रमोद यादव भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मृतक के घरवालों से घटना की जानकारी ली।
घटना सोमवार रात करीब 10 बजे की है। अब्दुल्लागंज निवासी 25 वर्षीय अमर सिंह पुत्र हरिभान यादव किसी काम से ग्राम देवता मंदिर के पास दुकान से सामान खरीदने के लिए पहुंचा। लौटते वक्त उसकी गांव के ही योगेश से किसी बात पर कहासुनी हो गई। योगेश ने अपने परिवार वालों को भी बुला लिया। उन्होंने अमर सिंह को घेर लिया। उसकी लाठी-डंडों से पिटाई की। उसी दौरान हमलावरों में से एक ने उसकी गर्दन पर चाकुओं से प्रहार किए। हमले में अमर सिंह ने मौके पर ही दमतोड़ दिया। इसकी भनक लगते ही मृतक पक्ष के लोग भी पहुंचे लेकिन हमलावर फरार हो गए।
अब्दुलागंज चौकी के पुलिस कर्मी शव लेकर यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी पहुंचे। डॉक्टर ने उसे अमर सिंह को मृत घोषित कर दिया। मृतक अमर सिंह उत्तराखंड के हरिद्वार में प्राइवेट नौकरी करता था। कहासुनी की वजह हालांकि साफ नहीं हो पाई है लेकिन ग्रामीणों की माने तो करीब नौ साल पहले दोनों पक्षों में रास्ते को लेकर विवाद हो गया था। ग्रामीणों ने उस वक्त फैसला भी करा दिया था। मंगलवार सुबह सीओ प्रमोद यादव मय पुलिस फोर्स घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने घटना को लेकर मृतक के घरवालों और ग्रामीणों से बात की। पुलिस ने मृतक के भाई यशपाल की तहरीर पर गांव के ही योगेश, उसके पिता ब्रह्मानंद, सत्येंद्र पुत्र गेंदन और यादव बाबू पुत्र विक्रम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मंगलवार अपराह्न पोस्टमार्टम के बाद अमर सिंह का शव गांव पहुंचा तो लोगों का जमघट लग गया।
...तो बच जाता अमर सिंह
उझानी। मृतक के भाई यशपाल ने बताया कि अमर सिंह के लिए मंगलवार को हरिद्वार जाना था। वह होली पर घर आया था। पिता हरिभान हरियाणा में नौकरी करता है। हरिभान चार-पांच दिन पहले काम पर चला गया लेकिन अमर सिंह ने मंगलवार को हरिद्वार जाने की बात कही थी। वह अगर पिता के कहने पर दो दिन पहले ही काम पर लौट जाता तो शायद जिंदगी से हाथ नहीं धोना पड़ता। हरिभान के दो बेटों में अमर सिंह छोटा था। उसकी शादी भी नहीं हुई थी। पिछले दिनों उसके रिश्ते की बात भी चली थी।