दंपति ने की बेटे के साथ आत्मदाह की कोशिश
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कोर्ट से स्टे होने के बावजूद दुकानों में ताले लग जाने से परेशान एक दंपति ने बेटे समेत मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे खुद के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्मदाह की कोशिश की। लेकिन आसपास के लोगों ने उनको बचा लिया।
कुंवरगांव नगर पंचायत में पुराने थाने के पास महेशचंद्र गुप्ता और भगवानदास ने वर्ष 1993 में सियाराम पुत्र तुर्सी से आवासीय प्लाट खरीद कर उसकी रजिस्ट्री कराई थीं। वे इन प्लाटों पर दुकानें और आवास बनाकर रहने लगे। राजस्व विभाग में किसी ने शिकायत कर दी कि यह निर्माण तालाब पाट कर किए गए हैं। इसकी जानकारी होने पर महेश गुप्ता ने कोर्ट की शरण ली और निर्माण संबंधी सुनवाई पूरी होने तक यथा स्थिति बनाए रखने का स्टे ले लिया। बीती 12 सितंबर को तत्कालीन तहसीलदार विजय कुमार ने पुलिस बल के साथ पहुंच कर महेश चंद्र गुप्ता की दुकान के साथ ही भगवानदास की तीन दुकानों में ताले डालवा कर तत्काल जगह खाली करने को कहा। इस पर महेश ने उन्हें कोर्ट से स्टे होने का हवाला दिया, लेकिन तहसीलदार ने कोई बात नहीं सुनी। इस बीच तहसीलदार विजय कुमार का तबादला हो गया। परेशान महेश मौजूदा तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद से मिले और अपने मामले की जानकारी दी। उन्होंने भी गौर नहीं किया। इस प्रकरण से परेशान महेश उनकी पत्नी संगीता और पुत्र दीपांशु ने मंगलवार को दिन 11 बजे अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्मदाह करने का प्रयास किया। लेकिन आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंच कर आग नहीं लगाने दी।
महेश ने आरोप लगाया कि तत्कालीन तहसीलदार ने उसे पहले से कोई नोटिस नहीं दिया था। महेश के परिवार में दो बेटियां भी हैं। एक बेटी निमिषा प्राइवेट शिक्षक है जबकि एक बेटी मनीषा एमबीए करने के बाद प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही है। बेटा दीपांशु परचून की दुकान पर बैठता था। यह दुकान भी पिछले नौ दिन से बंद है।
यह तो चकबंदी विभाग की गलती
कुंवरगांव। कस्बे में करीब 50 साल पहले चकबंदी हुई थी। चकबंदी विभाग ने रिहायशी इलाके को तालाब में दर्ज कर दिया था। उस वक्त भी यहां कुछ आवास बने थे। महेश चंद्र गुप्ता ने 1993 में इस जमीन का बैनामा कराया था। इसके बाद से वह यहां काबिज हैं। सूबे में हाल ही में अवैध कब्जों के खिलाफ शासन ने अभियान शुरू किया तो कुंवरगांव कस्बा भी रडार पर आ गया। इसी के चलते प्रशासन ने कार्रवाई की। खुद तहसीलदार इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि यह चकबंदी विभाग की गलती का मामला है। अगले दो दिन में निपटारा कर