मारुति वैन में रसोई गैस सिलेंडर से की जा रही गैस रिफिलिंग के दौरान आग लग गई। घटना बिसौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भीतर हुई, जिससे हड़कंप मच गया। एक के बाद एक दो सिलेंडरों में विस्फोट होने से अस्पताल में मरीज दहशत में आ गए। करीब दो घंटे के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान अफरा-तफरी के बीच स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित रहीं। गनीमत रही कि कोई घायल नहीं हुआ।
घटना शुक्रवार दोपहर की है। बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के चलते स्वास्थ्य विभाग में किराए पर चल रही मारूति वैन में सीएचसी के अंदर ही गैस रिफिलिंग की जा रही थी। इसी दौरान किसी तरह से रसोई गैस सिलेंडर ने आग पकड़ ली। आग ने विकराल रूप ले लिया। मारूति वैन धू-धू कर चलने लगी। गैस रिफिलिंग कर रहा युवक वहां से भाग गया। लोग कुछ समझ पाते इसी दौरान मारूति के सिलेंडर में विस्फोट हो गया। बाद में रसोई गैस सिलेंडर भी तेज धमाके के साथ फट गया। जबरदस्त धमाकों से दहशत में आए मरीज भी अस्पताल से निकल कर भागने लगे। आग ने पास में ही खड़ी दूसरी सरकारी वैन को भी चपेट में ले लिया। जब तक आग पर काबू पाया गया दोनों वाहन पूरी तरह से जल चुके थे।
खबर मिलने पर प्रभारी सीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने बिसौली पहुंच कर जांच की। उन्होंने सीएचसी के अंदर गैस रिफिलिंग मामले में जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है।
अस्पतालों में नहीं आग पर काबू के इंतजाम
बड़ा अग्निकांड हुआ तो होगी मुश्किल
बदायूं। अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। औपचारिकता के नाम पर एक दो सिलेंडर रखे गए हैं, लेकिन यह काम ही नहीं करते। जिला अस्पताल में भी यही हाल है। किसी अस्पताल में अग्निकांड होने की दशा में काफी मुश्किल हो सकती है।
बिसौली अस्पताल में अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। यहां भी आग बुझाने के कोई साधन नहीं थे। एनएचएम के बीपीएम कौशल शर्मा ने किसी तरह से सीएचसी की छत पर चढ़कर पानी डाला। आसपास के लोगों ने भी रेता आदि डालकर आग पर काबू की कोशिश की। बिसौली में फायर स्टेशन भी नहीं है। ऐसे में मुख्यालय से बिसौली तक फायर ब्रिगेड पहुंचने में देर लगती है। बिसौली में इससे पहले भी कई बार बड़े अग्निकांड हो चुके हैं।