मूसाझाग थाने में नाबालिग से गैंगरेप और उझानी में छात्रा को छत से फेंकने का मामला सामने आने के बाद पुलिस के आला अधिकारियों को थानों के ‘चोर’ दरवाजों की याद आ गई है। जिले के सभी थानों में ऐसे दरवाजों को बंद करने का काम शुरू हो गया है। पहरे की जिम्मेदारी मेन गेट की होती है। ‘चोर’ दरवाजे से थाने में आने वालों के बारे में पता ही नहीं चलता था।
उझानी कोतवाली में 15 जनवरी को सिपाही गौरव टाइटलर ने छात्रा को छत से फेंक दिया था। छात्रा का बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जांच के दौरान सामने आया कि छात्रा कोतवाली के पीछे वाले दरवाजे से अक्सर सिपाही के क्वार्टर में आया-जाया करती थी। 31 दिसंबर को मूसाझाग थाने में भी दो सिपाहियों ने नाबालिग से गैंगरेप किया था। दोनों सिपाही नाबालिग को पीछे के दरवाजे से थाने में लाए थे। 15 दिन में दो बार वर्दी दागदार हुई, तो पुलिस के अफसर को थानों के इधर-उधर के चोर दरवाजे याद आए हैं।
सभी थानों के गैरजरूरी दरवाजों को बंद कराने का काम शुरू हो गया है। कई थानों में दरवाजे बंद करा दिए गए हैं। थानों में अब एक ही दरवाजा रखा जाएगा, ताकि आने-जाने वालों पर नजर रखी जा सके।
- लल्लन सिंह, एसपी सिटी