पंजाब-उत्तराखंड ठहरकर बदायूं पहुंचे थे बांग्लादेशी
स्थानीय लोग मददगार बने तो बांग्लादेशी पहुंचे बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गदरौली गांव में पकड़े गए बांग्लादेशी सीधे बदायूं नहीं आए थे। इससे पहले वह पंजाब और उत्तराखंड में भी रुके थे। गदरौली के स्थानीय लोग पंजाब में नौकरी करते थे। जिससे बांग्लादेशियों की उनसे दोस्ती हो गई थी। फिर बांग्लादेशियों ने धीरे-धीरे बदायूं आना शुरू किया। लोग मददगार बनते गए और उन्होंने हमेशा के लिए बदायूं में स्थायी ठिकाना बना लिया।
बांग्लादेशियों ने बदायूं में अपने पैर जमाने के लिए लंबी दूरी तय की। उन्होंने कई झूठ भी बोले। भले ही उनका इरादा कुछ रहा हो, लेकिन पकड़े जाने के बाद उनके झूठ सामने आए हैं। उन्होंने कभी अपने आपको बांग्लादेशी नहीं बताया। वह खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताते थे। लोग यही समझते रहे कि बंगाली लोगों को बदायूं आना और यहां अपना कारोबार जमाना कोई बड़ी बात नहीं है। बदायूं जिले में कई बंगाली लोग रह रहे हैं। इनमें कोई डॉक्टरी कर रहा है, तो कोई शर्तिया इलाज की दुकानें खोले हुए है। पकड़े गए बांग्लादेशी पंजाब में बंगाली बनकर पहुंचे थे। इन्होंने शुरू से ही ठान लिया था कि वह कभी यह राज नहीं खोलेंगे। छानबीन में पुलिस को पता चला कि दातागंज कोतवाली क्षेत्र के कुछ लोग पंजाब में नौकरी करते थे। वहीं कई बिहारी और बंगाली लोग भी काम कर रहे थे। यह बांग्लादेशी भी उन्हीं में शामिल हो गये। इनकी विशेषता थी कि यह लोग किसी से नाराज नहीं होते थे। दोस्ती करने में नंबर वन रहे। बांग्लादेशियों ने बदायूं आने के लिए क्षेत्रीय लोगों का ही सहारा लिया।
दातागंज कोतवाली क्षेत्र में पैर जमाने के लिए बांग्लादेशियों ने इमोशनल ड्रामा किया था। भोले-भाले लोग कुछ समझ नहीं पाए और उन्होंने एक-एक साल करके पूरे दस साल गुजार दिए। आज भी क्षेत्रीय लोग उनके बांग्लादेशी निकलने पर सकते मे हैं।
बांग्लादेशियों के लिए मुसीबत बना पासपोर्ट आवेदन
वैसे पुलिस को कभी पता नहीं चलता कि जिले में कोई बांग्लादेशी भी रह रहे हैं। अगर वह पासपोर्ट के लिए आवेदन नहीं करते। उनको पासपोर्ट के लिए आवेदन करना ही मुसीबत की जड़ बन गया और पुलिस के जाल में फंसकर जेल चले गए।