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दहशत : दूसरे गांव में बसना चाह रहा था किसान परिवार

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बदायूं। रसूलपुर गांव में आरोपियों की दबंगई इतनी हावी थी कि किसान का परिवार दूसरे गांव में बसने की तैयारी कर रहा था। इसके चलते किसान किशनपाल ने अपने नाम की पांच बीघा जमीन शहर के मनोज गुप्ता को बेच दी थी। उसके बदले दौरी गांव में जमीन खरीदकर अपना मकान बनवाना चाहते थे, फिर वहीं जाकर बस जाते।
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किसान किशनपाल के परिवार में पत्नी सीमा, 25 वर्षीय बेटा अमरजीत, उसकी बहू, 20 वर्षीय छोटा बेटा ओमप्रवेश, पंद्रह वर्षीय बेटी रजनी, 13 वर्षीय शीतल, 10 वर्षीय नीतू हैं। आमदनी का कोई खास जरिया नहीं। केवल मजदूरी पर पूरा परिवार निर्भर है जबकि आरोपियों के पांच घर हैं। तीन भाइयों के सात बेटे हैं। एक आरोपी रामऔतार सहसवान में सफाई कर्मचारी है। उसके दो बेटे श्रीराम और विवेक हैं। श्रीराम की शादी हो चुकी है विवेक की नहीं हुई है। दोनों ही पढ़ाई कर रहे हैं। आरोपी रामेश्वर बीमा एजेंट है। उसके दो बेटे देवेंद्र और ओमवीर हैं। दोनों ही मोबाइल मैकेनिक हैं। यह सभी एफआईआर में नामजद हैं।
इसके अलावा रामेश्वर और रामऔतार का तीसरा भाई रामदास है। वह होमगार्ड में प्लाटून कमांडर था। अब वह रिटायर हो चुका है। इस मामले में रामदास नामजद नहीं है लेकिन उसका बेटा ओमेंद्र और रामेंद्र दोनों नामजद हैं। उसके तीसरे बेटे सत्यपाल के खिलाफ रिपोर्ट नहीं है। तीनों परिवारों के घर भी अलग-अलग हैं। गांव में वर्चस्व भी है। रामदास का घर किशनपाल के सामने है। इससे हर समय तनातनी का माहौल रहता था। किसान के परिवार वाले काफी समय से असुरक्षित महसूस कर रहे थे।
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किसान के बेटों के कपड़ों से नहीं मिटे हैं खून के धब्बे
किसान के बेटों के कपड़ों पर लगे खून के धब्बे अभी भी आरोपियों की दबंगई की गवाही दे रहे हैं। किसान के छोटे बेटे ओमप्रवेश ने बताया कि आरोपी इतने दबंग हैं कि वह जब चाहे उसके घर में घुसकर मारपीट कर देते थे। 23 अप्रैल को उन्होंने गेहूं में आग लगाई थी। इसके दूसरे दिन यह बोले थे कि हमने आग लगाई है बोलो हमारा क्या कर लोगे। उनकी बात सही थी। हमने तमाम कोशिश कर ली। चौकी से लेकर थाने और एसएसपी कार्यालय के भी चक्कर लगाए लेकिन उनका कुछ नहीं हुआ। जब उसके पिता ने आत्मदाह कर लिया तो पुलिस कार्रवाई को तैयार हुई है। इसके बावजूद उसका परिवार हमेशा असुरक्षित महसूस करेगा। क्या पता पुलिस आज कार्रवाई की बात कह रही है कल मुकर जाए। जब आरोपियों ने उसके और परिवार वालों के साथ मारपीट की थी तो उसमें उसका, अमरजीत का सिर फूटा था। पिता के गंभीर चोटें आईं थीं। छोटी बहन को उठाकर सड़क पर फेंक दिया था। इस बात को करीब 25 दिन हो गए लेकिन कपड़ों पर खून के धब्बे आज भी नहीं मिटे हैं। चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं।
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