बदायूं। फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के गांव दांवरी में प्रेमशंकर (65) और उनकी पत्नी भगवानदेई (62) की पौत्र हेमेश ने धारदार हथियार से हत्या कर दी। दोनों के शव अलग-अलग बंद मकानों के अंदर मिले। पुलिस के मुताबिक हत्या बुधवार यानी 22 जून को हुई। शनिवार शाम दुर्गंध फैलने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मकानों के ताले तुड़वाकर शव बाहर निकाले। दंपती के शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। पुलिस ने दंपती के मंझले बेटे गेंदनलाल की तहरीर पर भतीजे हेमेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी अभी फरार है।
गांव दांवरी के प्रेमशंकर और उनकी पत्नी भगवानदेई अलग-अलग मकानों में अकेले रहते थे। उनके तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा रामपाल अपनी पत्नी-बच्चों के साथ दिल्ली में रहता है। मझला गेंदनलाल गांव के एक अन्य व्यक्ति के मकान में और छोटा इंद्रपाल अपनी ससुराल में रहता है। पुलिस के मुताबिक 22 जून की शाम ग्रामीणों ने रामपाल के बेटे हेमेश को दोनों घरों में आते-जाते देखा था। बाद में वह बृहस्पतिवार तड़के बिना किसी से मिले दिल्ली चला गया। इधर, शनिवार शाम जब गांव में ज्यादा दुर्गंध फैली, तब पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक प्रेमशंकर का गला काटा गया जबकि भगवानदेई के शरीर पर कई वार किए गए। हेमेश को पकड़ने के लिए पुलिस टीम दिल्ली रवाना कर दी गई है।
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शराब के रुपये न देने पर दादी को पीटता था पौत्र...
आसफपुर / फैजगंज बेेहटा (बदायूं)। फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के गांव दांवरी में बुजुर्ग दंपती की हत्या का आरोपी हेमेश शराब पीने का आदी था। दंपती के मझले बेटे गेंदनलाल के अनुसार हेमेश अक्सर अपनी दादी से शराब पीने को रुपये मांगता था। जब वह रुपये देने को मना करतीं तो उनके साथ मारपीट करता था। वह कई बार उनके साथ मारपीट कर चुका था। 22 जून को चोरों की तरह दादा-दादी के घर आने-जाने से उस पर शक गहराया।
दंपती प्रेमशंकर और भगवानदेई का बड़ा बेटा रामपाल दिल्ली में रहता है और वहीं काम करता है। दंपती ने जो उसको मकान दिया है। उसमें प्रेमशंकर रहते थे जबकि गांव के अंदर बने पुराने मकान में भगवानदेई रहती थीं। यहीं वह खाना बनाती थीं। खाना खा पीकर प्रेमशंकर रात को रामपाल के मकान में सोने चले जाते थे।
रामपाल के तीन बेटे और एक बेटी है, जिनमें हेमेश सबसे बड़ा है। गेंदनलाल के मुताबिक रामपाल त्योहार पर गांव आते हैं लेकिन उसका बेटा हेमेश महीने में दो-तीन चक्कर लगा जाता है। वह जब भी गांव आता है, दादी से रुपये लेकर जाता है। दादी ने कई बार उसके चाल चलन पर सवाल उठाया था। उससे कहा था कि वह कुछ काम धंधा किया करे और रुपये कमाया करे। वह कब तक ऐसा करेगा लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया।
जब भगवानदेई ने रुपये देना बंद कर दिए तो उसने मारपीट करना शुरू कर दी। गेंदनलाल ने पुलिस को बताया कि हेमेश 22 जून को गांव आया था। तब वह अपना चेहरा अंगोछे से ढके हुए था लेकिन उसकी चाल-ढाल से लोगों ने उसे पहचान लिया था। उस दिन वह लोगों से बच रहा था। बृहस्पतिवार सुबह वह दोनों मकानों में ताला डालकर दिल्ली भाग गया। मकानों पर ताला डालने से उस पर और शक हुआ। फिर तमाम ग्रामीणों ने उसे दोनों घरों से आते-जाते देखा था। इससे परिवार वाले उसे ही हत्यारोपी मान रहे हैं।
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सुबह से आ रही थी दुर्गंध, शाम ज्यादा फैली तब खुलवाए गए मकान
ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें सुबह से दुर्गंध आ रही थी। सुबह के समय ज्यादा दुर्गंध महसूस नहीं हुई लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता गया वैसे दुर्गंध बढ़ती चली गई। शाम तक लोगों को दोनों घरों के नजदीक ठहरना मुश्किल हो गया। चूंकि दंपती के दो घर थे। इसलिए वह भी भ्रम में रहे कि दंपती कौन से घर में होंगे। कौन कहां होगा यहां अंदाजा लगाना मुश्किल था। जब दोनों मकानों के ताले तुड़वाए गए। तब इस घटना का पता चला।
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गांव में काम करता है गेंदनलाल
दंपती का मझला बेटा गेंदनलाल गांव में कर्मवीर सिंह के यहां काम करता है और उनके ही मकान में रहता है। गेंदनलाल के दो बेटियां हैं। वह एक बेटी की शादी कर चुका है। एक बेटी शादी को है। वह भी गेंदनलाल के साथ रहती है। कभी कभी जब काम से छुट्टी मिलती थी। वह अपने माता-पिता से मिलने पहुंच जाता था।
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छोटे बेटे को ससुराल में मिली है जमीन
बुजुर्ग दंपती के छोटे बेटे इंद्रपाल की ससुराल उघैती क्षेत्र के गांव स्वरूपुर में है। उसके साला नहीं है। उसे ससुराल में ही जमीन मिली है। इससे इंद्रपाल अपनी ससुराल में रहता है। दंपती की हत्या के दौरान भी वह ससुराल में ही था। उस वक्त केवल मौके पर गेंदनलाल पहुंचा था। बाद में इंद्रपाल भी पत्नी के साथ पहुंच गया।
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तीन सौ मीटर की दूरी पर हैं दोनों मकान
दंपती का पुराना मकान गांव के अंदर बना है। पहले पूरा परिवार वहीं रहता था लेकिन जैसे-जैसे दंपती के बेटों की शादी होती गई और वह काम धंधे में लगते गए। वैसे ही उन्होंने अपना ठिकाना भी अलग बना लिया। रामपाल ने मेहनत मजदूरी कर गांव के बाहर दूसरा मकान बनवा लिया लेकिन रामपाल वहां नहीं रहता था। वह दिल्ली में रहता था। वहां रात को प्रेमशंकर सोते थे। दोनों मकानों की दूरी करीब तीन सौ मीटर थी।
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गेंदनलाल बोला- रात को पिता और सुबह मां की हुई हत्या
- गेंदनलाल ने बताया कि जब हेमेश उनकी हत्या करके भाग गया। उस समय किसी को भनक तक नहीं लगी हेमेश उसके माता-पिता की हत्या कर गया है लेकिन शव मिलने के बाद तमाम लोगों ने हेमेश के गली में आने-जाने का समय तक बताया। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उसने रात को करीब 12 बजे दादा और सुबह चार बजे दादी की हत्या की। इसके बाद दिल्ली भाग गया।