बदायूं। सहसवान की विवादित जमीन का मामला एक बार फिर गर्म है। अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद दो साल पहले यहां जो प्लाटिंग का सिलसिला शुरू हुआ वह अब रुक नहीं रहा है। खास बात ये है कि अधिकारी भी इस ओर नजर डालने से कतरा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय की कस्टोडियन एनिमी प्रॉपर्टी के अधिकारियों की निगाह में भी इस बात को नहीं आने दिया गया। अब सहसवान के ही कुछ लोगों ने इस मामले की गोपनीय शिकायत मुख्यमंत्री से की है।
जिले में बदायूं, ककराला, सहसवान, बिसौली और दातागंज में करीब दो सौ शत्रु संपत्तियां हैं, जो भूअभिलेख के रिकॉर्ड में हैं। सहसवान में भी शत्रु संपत्ति व इससे सटी विवादित जमीन का मामला दो साल पहले मीडिया की सुर्खियां बना था। नगर निवासी जमशेद गुड्डू ने प्रशासन समेत शासन को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि तहसील क्षेत्र के शहवाजपुर में गाटा संख्या 78, 86/1 तथा 86/2 शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज हैं जबकि 118, 119, 120, 121, 122, 123,142, 143, 145 आदि विवादित हैं। एक पक्ष ने जहां इसे अपना बताते हुए बैनामे कर दिए वहीं दूसरा पक्ष इसे राज्य सरकार की संपत्ति बता रहा था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि जब भूमि के सभी मालिक पाकिस्तान चले गए थे और उनकी सारी संपत्ति निष्क्रांत संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गई थी। बाद में एक भाग शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया तो अन्य को क्यों नहीं किया गया।
शिकायत मिलने पर तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने अधिकारियों को भूमि पर हो रहे बैनामे तथा हो चुके बैनामों के दाखिल खारिज होने पर रोकने का आदेश कर दिया था लेकिन इसके बाद भी अधिकारी बैनामे करते रहे, जिस पर डीएम ने कई कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की थी लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडा पड़ गया।
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मुख्यमंत्री को भेजा गया गोपनीय पत्र
भले ही अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद यह मामला दब गया हो लेकिन अब एक बार फिर किसी ने मुख्यमंत्री को रजिस्ट्री के माध्यम से गोपनीय पत्र भेजकर इस मामले की तरफ ध्यान आकर्षित कराया है। पत्र भेजने वाले ने यह भी जिक्र किया है कि शत्रु संपत्ति के पास विवादित जमीन को बेचकर प्लॉटिंग कराने वाले लोग बेहद शातिर हैं, जिससे वह अपना नाम नहीं बताना चाहता, क्योंकि उन लोगों से उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। पत्र भेजने वाले का यहां तक कहना है कि कुछ अधिकारी व कर्मचारियों की भी इसमें संलिप्तता है। उसने मुख्यमंत्री से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, हालांकि एसडीएम सहसवान महिपाल सिंह का कहना है कि अभी उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर वह जांच भी करेंगे और गलत मिलने पर कार्रवाई भी।