बदायूं। सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय के बाबू का मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बनाने के नाम पर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है। इसका सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में मेडिकल के लिए लाइसेंस का आवेदन करने वाले युवक से औषधि कार्यालय का बाबू 50 हजार रुपये जमा कराने को कह रहा है। इसके साथ ही एक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की संचालिका का ऑडियो भी वायरल हुआ है। इसमें संचालित लाइसेंस के लिए 70 हजार रुपये में डील कर रही है। कह रही है कि वह साहब से बात कर लेगी, रिटेल का लाइसेंस है, काम हो जाएगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय के अधिकारियों और बाबुओं की साठगांठ से जिले में सैकड़ों की संख्या में अवैध तरीके से मेडिकल स्टोर चल रहे हैं। इन पर घटिया दवाओं की बिक्री भी हो रही है। सैकड़ों मेडिकल स्टोर मानकों को पूरा नहीं कर रहे। कई बार बिना लाइसेंस चलाए जा रहे मेडिकल स्टोर पकड़े जा चुके हैं। कार्रवाई के नाम पर औषधि विभाग खानापूरी कर देता है। नए मेडिकल स्टोर के लिए लाइसेंस जारी करने में बड़े स्तर पर खेल हो रहा है। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है, लेकिन आवेदन को उन्हीं सीएससी से आवेदन करना होता है जहां से औषधि कार्यालय के बाबू बताते हैं। इन सीएससी सेंटर पर उनकी सेंटिंग रहती है। वजीरगंज के बगरैन कस्बे के एक युवक मढ़ाई चौक स्थित एक सीएससी सेंटर से मेडिकल स्टोर के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। यह सीएससी सेंटर एक महिला चलाती है।
मेडिकल लाइसेंस के लिए इस महिला ने आवेदक से 70 हजार में डील की। इसकी भी ऑडियो वायरल हो रही है। महिला से कॉल पर बात करने के बाद युवक कलक्ट्रेट स्थित औषधि कार्यालय पहुंचा और वहां संबंधित बाबू से बात की तो उसने 50 हजार रुपये बिना नाम लिए संबंधित महिला के पास जमा करने के लिए कहा। यह भी कहा कि ज्यादा गणित न लगाओ और भागदौड़ न करे काम हो जाएगा। वीडियो और ऑडियो वायरल होने के बाद औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार किरकिरी से बचने के लिए कॉल रिसीव नहीं कर रहे।
डीआई ने नहीं की कॉल रिसीव
डीआई नवनीत कुमार से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई। कई बार कॉल करने के बाद भी उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। बाद में उनका नंबर कवरेज एरिया के बाहर हो गया। गौर करने वाली बात यह है कि डीआई पिछले कई दिन से जिले भर में मेडिकल स्टोर पर छापा मार रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा।