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प्रियंका का नारा, लल्लू की सभा बेकार, कांग्रेस को वोट मिले दस हजार

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बदायूं। कांग्रेस ने इस चुनाव में ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ जैसे नारे के दम पर जितनी कोशिश की, उतने वोट नहीं मिल पाए। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने सभा भी बेकार गई। पूरे जिले में पार्टी को सिर्फ 10182 वोट मिले और सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
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कांग्रेस का ग्राफ जिले में बड़ी तेजी से गिरता जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पार्टी जिले में सक्रिय नहीं है। दरअसल जिले में विपक्ष के तौर पर सर्वाधिक धरना प्रदर्शन कांग्रेस ही करती नजर आती है। इसके बावजूद ये जोश वोट बैंक में नहीं बदलता बल्कि हर साल कम होता जा रहा है। इस बार जिले में कांग्रेस को कुल 10182 वोट मिले हैं।
इनमें सर्वाधिक वोट दातागंज के प्रत्याशी को 2409 और सर्वाधिक कम बिसौली की प्रत्याशी को 1088 मिले हैं। इनके साथ ही बिल्सी प्रत्याशी को 1889, सहसवान प्रत्याशी को 1123, शेखूपुर प्रत्याशी को 1448 और सदर की प्रत्याशी को 2225 वोट ही मिले हैं। इनसे स्थिति काफी ढुलमुल रही है। कई जगह नोटा को मिले वोटों का आंकड़ा कांग्रेस के वोटों से ज्यादा है।
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जिले में कई साल से रसातल में है। दो हजार के दशक से तो सांसदी व विधायकी में कहीं पार्टी का प्रतिनिधि सदन में नहीं पहुंच सका। और तो और हर चुनाव में पार्टी का जनाधार खिसकता जा रहा है। हर चुनाव में मतदान के आंकड़े इसका प्रमाण हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की यूपी में जोरदार एंट्री के बाद बदायूं जिले में भी पार्टी की चमक बढ़ने की बात कही जा रही थी। यहां आए वरिष्ठ नेताओं ने टिकट वितरण से पहले दावा किया कि वह इस बार प्रियंका गांधी के दावे के तहत 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देंगे। यह भी कहा गया कि टिकट पार्टी के लोगों को ही दिया जाएगा। किसी बाहरी नेता या प्रत्याशी को कांग्रेस टिकट नहीं देगी चाहे वह कितना ही मजबूत क्यों न हो। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी बदायूं में सभा करके पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा था।
हालांकि टिकट के मामले में पार्टी अपने दावे पर कायम न रह सकी। पार्टी ने शहर व बिल्सी में भाजपा पृष्ठभूमि से आए लोगों को टिकट दे दिया। महिलाओं को टिकट देने का वायदा जरूर पूरा किया और दो की बजाय तीन महिलाओं को टिकट भी दिया। यह और बात है कि शेखूपुर से टिकट मिलने के बाद फरहा नईम ने तो प्रेसवार्ता करके उसे वापस कर दिया और जिला अध्यक्ष ही आरोपों के घेरे में खड़ा कर दिया। बाद में उनकी जगह कांग्रेस ने ममता देवी प्रजापति को प्रत्याशी बनाया जो हार गईं। जाति-धर्म के तड़के के बिना और पहली बार घोषित किए गए कांग्रेस प्रत्याशी कोई करिश्मा न कर सके। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की स्थिति काफी बुरी रही है।
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इस चुनाव में हमारे प्रत्याशियों व संगठन ने काफी मेहनत की थी पर उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं मिले हैं। हम इसकी स्थानीय स्तर पर समीक्षा करेंगे। उच्चस्तर से भी समीक्षा की जाएगी। निर्देश के मुताबिक रणनीति में बदलाव किया जाएगा।
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- ओमकार सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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