बदायूं। शहर के चर्चित गुप्ता दंपती हत्याकांड में सीबीआई ने कोतवाली पुलिस को क्लीन चिट दे दी है। सीबीआई ने शुरुआत में मामले की जांच करने वाले पुलिस कर्मियों पर सवाल उठाए थे। स्थानीय पुलिस इसे केवल हत्या मान रही थी, जबकि सीबीआई ने लूट और हत्या बताते हुए सह आरोपी योगेश वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
साल 2015 में शहर के ब्राहमपुर मोहल्ला निवासी रिटायर्ड इंजीनियर ब्रजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की घर में पेचकस से गोदकर हत्या कर दी गई थी। तीन दिन बाद जब मोहल्ले में काफी दुर्गंध फैली तो सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने अंदर जाकर देखा तो दोनों के सड़े-गले शव मिले थे। शुरुआत में शहर कोतवाली पुलिस घटना को लूटपाट के इरादे से हत्या नहीं मान रही थी। उनके शरीर पर सोने के जेवर मिले थे। चूंकि ब्रजेंद्र गुप्ता अपने बेटे मुकुल गुप्ता के फर्जी एनकाउंटर केस का मुकदमा लड़ रहे थे। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही थी। इससे यह मामला भी सीबीआई के पास पहुंच गया था।
सीबीआई ने जांच करते हुए ब्राहमपुर मोहल्ले के ही आत्महत्या कर चुके उदय प्रकाश वर्मा को मुख्य आरोपी बनाया था, जबकि उसके भाई योगेश वर्मा को सह आरोपी बनाया था। पिछले साल सीबीआई ने आरोपी योगेश वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस की भूमिका की जांच जारी रखी थी। इसके तहत कोतवाली में तैनात रहे सिपाही जगवीर का नारको टेस्ट भी कराया गया था। उसमें जगवीर के खिलाफ कोई तथ्य सामने नहीं आया था। इससे सीबीआई ने कोतवाली पुलिस को क्लीन चिट दे दी।
ऐसे हुआ था खुलासा
- दोहरे हत्याकांड की विवेचना के दौरान सीबीआई ने मुख्य आरोपी उदय प्रकाश वर्मा के घर से कुछ कपड़े और अन्य सामान बरामद किया था। इसके अलावा सीबीआई ने क्राइम सीन से कुछ ब्लड सैंपल लिए थे। मोहल्ले के करीब 64 लोगों के भी सैंपल लिए गए थे। इनमें एक सैंपल आरोपियों के खून से मिलान हो गया था। इससे सीबीआई ने उदय प्रकाश को मुख्य आरोपी और योगेश को लूटे गए रुपये और जेवर ठिकाने लगाने व साक्ष्य मिटाने का आरोपी बनाया था।
अभी जमानत पर योगेश
- योगेश वर्मा इस समय जमानत पर है। पिछले साल उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सीबीआई ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। पहले योगेश ने भी नारको टेस्ट कराने से इन्कार कर दिया था लेकिन बाद में उसने खुद नारको टेस्ट कराने को कहा था। इस पर उसका भी नारको टेस्ट कराया गया था।