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चिप्स-पापड़ की मांग ने बढ़ाई आलू की कीमत

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उझानी में व्यापार के लिए चिप्स बनातीं महिलाएं। संवाद - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। होली नजदीक आते ही चिप्स और पापड़ में खपत बढ़ जाने से आलू के रेट में इजाफा होने लगा है। पिछले कुछेक साल से दिल्ली और मुंबई की तरफ कारोबारियों ने रुख किया तो वहां भी जिले के आलू के चिप्स काफी पसंद किए जा रहे हैं।
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आलू की पैदावार इस बार अच्छी रही है। गुणवत्ता के मामले में भी बदायूं जिले के आलू का पसंद किया जाता है। त्योहार नजदीक होने से घरेलू इस्तेमाल और व्यापार के लिए चिप्स और पापड़ बनाने का काम शुरू हुआ तो सात-आठ दिनों से आलू के रेट में इजाफा होता चला गया। पिछले साल इन दिनों में सामान्य आलू का भाव करीब सात सौ रुपया प्रति क्विंटल था। चिप्सोना प्रजाति के आलू का भाव सामान्य के मुकाबले करीब डेढ़ सौ रुपया प्रति क्विंटल अधिक रहा था। इस बार आलू के भाव में करीब सौ रुपया प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। खेत में ही आठ सौ रुपया प्रति क्विंटल तक आलू बिक रहा है। फुटकर मार्केट में आलू 14 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। जानकार बताते हैं कि त्योहार के आसपास चिप्स में आलू का इस्तेमाल बढ़ जाने से ही इन दिनों में भाव में उछाल आता है। यहां के आलू के चिप्स दिल्ली और मुंबई भी भेजे जाते हैं। इसके लिए नगर समेत आसपास इलाके में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर चिप्स की भट्ठियां चल रहीं हैं।
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भंडारण में भी बढ़ा प्रति पैकेट 10 रुपये किराया
आलू की खोदाई का इन दिनों पीक टाइम है। इसीलिए किसानों ने अगले साल के लिए बीज और घरेलू इस्तेमाल के लिए आलू का शीतगृहों में भंडारण शुरू कर दिया है। भंडारण के लिए रोजाना तड़के से ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी लाइन लग जाती है। शीतगृह मालिकानों में मोहन लाल गर्ग बताते हैं कि लाल आलू काफी कम आ रहा है। इस बार भंडारण का रेट पिछले साल के मुकाबले प्रति पैकेट 10 रुपये बढ़ा है। जूट के पैकेट का किराया 135 रुपये, जाली के पैकेट का किराया 145 और शुगर फ्री आलू का भंडारण 155 रुपये प्रति पैकेट लिया जा रहा है। शु्गर फ्री आलू उन्हीं शीतगृहों में लिया जाता है, जहां अलग से चैंबर बने हैं।
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पहले थे 28, अब आधे भी नहीं बचे कोल्ड स्टोर
आलू भंडारण में उझानी का नाम प्रदेश स्तर पर रहा। प्रदेश में सर्वाधिक कोल्ड स्टोर आगरा जिले में हैं। दूसरे नंबर पर फर्रुखाबाद फिर उझानी का नाम था। जिले में पहले और प्रदेश में तीसरे स्थान पर शुमार उझानी में उस वक्त 28 कोल्ड स्टोर हुआ करते थे। धीरे-धीरे कोल्ड स्टोर मालिकानों का मोहभंग हुआ तो संख्या में गिरावट होती रही। इस वक्त 11 ही संचालित हैं। इसके पीछे की वजह को लेकर हरिप्रकाश छाबड़ा कहते हैं कि कोल्ड स्टोर चलाने में काफी खर्चा आता है। बिजली की किल्लत हो जाए तो खर्चा और बढ़ जाता है।
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